श्रद्धा और भक्ति के साथ कल्पसूत्र की महिमा का हुआ बखान
रिपोर्टर – नवनीत राय ‘रुचिर’, सोजत
सोजत। श्री शांति वर्धमान जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित अष्टाह्निका व्याख्यानमाला के तहत पर्युषण महापर्व के चौथे दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ कल्पसूत्र की महिमा एवं दस कल्पों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया। इस अवसर पर विधि-विधान से कल्पसूत्र वाचन भी प्रारंभ हुआ।
प्रवचनकार गौरव भाई ने कहा कि पुण्य का पोषण और पाप का शोषण करने की अपूर्व शक्ति पर्युषण महापर्व में निहित है। पावन तीर्थों की यात्रा के लिए मनुष्य को स्वयं अपना घर छोड़कर जाना पड़ता है, जबकि पर्युषण जैसे महान पर्व कालक्रमानुसार स्वयं हमारे द्वार पर दस्तक देते हुए आते हैं। इसलिए पर्वाधिराज पर्युषण के इन पवित्र दिनों में प्रत्येक व्यक्ति को विशेष धर्माराधना, तप, त्याग, स्वाध्याय और आत्मचिंतन करना चाहिए।
इससे पूर्व कल्पसूत्र की पांच वासक्षेप पूजा, अष्टप्रकारी पूजा एवं सोना-रुपा उछामणी संपन्न हुई। तत्पश्चात विधिवत आज्ञा लेकर कल्पसूत्र का वाचन प्रारंभ किया गया। प्रातःकाल विभिन्न जिन मंदिरों में स्नात्र पूजा पढ़ाई गई, वहीं सांयकाल श्री विमलनाथ भगवान मंदिर सहित नगर के सभी जिनालयों में आकर्षक अंगरचना की गई।
प्रवचन में श्रीसंघ अध्यक्ष सुरेंद्र मेहता, जगदीश कोठारी, मांगीलाल मेहता, संजय संचेती, अनिल सिंघवी, संदीप भण्डारी, नरेश ओस्तवाल और नरेंद्र खारीवाल सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।









