वैश्विक शांति और मानवीय संवेदनाओं का साहित्य है स्वामी माधवानंद पुरी की रचनाधर्मिता—महामंडलेश्वर अवतार पुरी

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वैश्विक शांति और मानवीय संवेदनाओं का साहित्य है स्वामी माधवानंद पुरी की रचनाधर्मिता—महामंडलेश्वर अवतार पुरी

रिपोर्टर – नवनीत राय ‘रुचिर’, सोजत 

सोजत। जाड़न आश्रम में आयोजित ‘परमहंस श्री स्वामी माधवानंद पुरी जी महाराज के साहित्य में मानवीय मूल्य’ विषयक कार्यक्रम के द्वितीय दिवस पर संतों, विद्वानों एवं विद्यार्थियों ने स्वामीजी के जीवन-दर्शन और साहित्यिक अवदान पर गंभीर चिंतन किया।

मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर स्वामी अवतार पुरी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि परमहंस श्री स्वामी माधवानंद पुरी जी महाराज का साहित्य वैश्विक शांति, मानवीय संवेदना और लोककल्याण की भावना से ओतप्रोत है। उन्होंने करीब पचास वर्ष पूर्व ही अपने लेखन के माध्यम से विश्व में शांति और सद्भाव की परिकल्पना प्रस्तुत कर दी थी। आज आवश्यकता है कि उनके साहित्य का व्यापक अध्ययन और अध्यापन किया जाए, ताकि उसमें निहित मानवीय मूल्यों को आत्मसात करते हुए विश्व शांति की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।

कार्यक्रम में महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानेश्वर पुरी महाराज तथा महामंडलेश्वर स्वामी फूल पुरी महाराज का संत सान्निध्य प्राप्त हुआ। दोनों संतों ने स्वामी माधवानंद पुरी जी के आध्यात्मिक चिंतन, मानवीय दृष्टिकोण और साहित्य की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं एवं व्याख्याताओं ने परमहंस श्री स्वामी माधवानंद पुरी जी महाराज के जीवन-वृत्त, साहित्य-साधना और मानवीय मूल्यों पर शोधपरक पत्रों का वाचन किया। वक्ताओं ने कहा कि उनका साहित्य मनुष्य को आत्मचिंतन, करुणा, सद्भाव और विश्वबंधुत्व की प्रेरणा देता है।

कार्यक्रम में प्रबंध निदेशक झूमरलाल गर्ग, निदेशक डॉ. सुरेश गर्ग, प्राचार्य मोखा चौधरी, प्रवीण त्रिवेदी, सुमेर सिंह देवड़ा, महिपाल सिंह, लखाराम गर्ग, अशोक कुमार, हितेश्वर लखावत, अर्जुन सिरवी, साक्षी गुप्ता एवं धीरज राठौड़ सहित अनेक गणमान्य नागरिक, व्याख्याता और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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