पर्युषण जीवन से विकारों को दूर करने का महापर्व : गौरव भाई
तीसरे दिन पौषध कर्तव्य का किया विवेचन, आज से होगा कल्पसूत्र का वाचन
रिपोर्टर – नवनीत राय ‘रुचिर’, सोजत
सोजत। श्री शांति वर्धमान जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित अष्टाह्निका व्याख्यानमाला के अंतर्गत पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन पौषध कर्तव्य का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया। धर्मसभा में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने श्रद्धापूर्वक प्रवचन का लाभ लिया।
प्रवचनकार गौरव भाई ने कहा कि पर्व की आराधना किसी भी रूप में करने वाले व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अवश्य आता है। पर्युषण केवल आठ दिनों तक सीमित रहने वाला पर्व नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन को धर्ममय बनाने वाला महापर्व है। जीवन में प्रवेश कर चुकी गलत सोच, बुरी प्रवृत्तियों और विकारों को सदैव के लिए बाहर निकालकर आत्मशुद्धि की दिशा में आगे बढ़ना ही इसकी सार्थकता है।
प्रवचन से पूर्व श्रद्धालुओं द्वारा पवित्र ‘कल्पसूत्र’ के चढ़ावे बोले गए। ट्रस्ट की ओर से बताया गया कि शुक्रवार से प्रवचन के दौरान कल्पसूत्र का विधिवत वाचन प्रारंभ किया जाएगा।
इससे पूर्व प्रातःकाल श्री विमलनाथ भगवान मंदिर एवं श्री गोडी पार्श्वनाथ भगवान मंदिर में श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ स्नात्र पूजा पढ़ाई गई। वहीं, संध्याकाल में नगर के सभी जैन मंदिर दीपकों की ज्योति से आलोकित हो रहे हैं, जिससे समूचे वातावरण में भक्ति और आध्यात्मिकता की अनुपम छटा बिखर रही है।
प्रवचन में संघ के संजय संचेती, अनिल सिंघवी, संदीप भंडारी एवं नरेंद्र खारीवाल सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं और धर्मावलंबी उपस्थित रहे।









