आजादी के 79 वर्ष बाद भी रूपावास को नसीब नहीं नियमित नल का पानी
तालाब और मीठे पानी की वेरी बनी सहारा, 15-20 दिन में महज घंटेभर जलापूर्ति
रिपोर्टर – नवनीत राय ‘रुचिर’, सोजत
सोजत। समीपस्थ ग्राम रूपावास में पेयजल की समस्या ग्रामीणों के लिए लंबे समय से परेशानी का सबब बनी हुई है। आजादी के 79 वर्ष बाद भी करीब एक हजार घरों की आबादी वाले इस गांव में नियमित नल जलापूर्ति का सपना अधूरा है। हालात यह हैं कि ग्रामीणों को अपनी रोजमर्रा की पेयजल जरूरतों के लिए आज भी तालाब तथा तालाब में स्थित मीठे पानी की वेरी पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
रूपावास निवासी शिक्षा विभागीय पुस्तकालय सेवा के अधिकारी दलपत सिंह राजपुरोहित के अनुसार गांव में करीब तीन वर्ष पूर्व पेयजल टंकी का निर्माण करवाया गया और घरों तक नल कनेक्शन भी पहुंचा दिए गए, लेकिन नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो पाई। नलों में पानी आने का अंतराल इतना लंबा है कि करीब 15 से 20 दिन बाद महज एक घंटे के लिए पानी की आपूर्ति होती है। ऐसे में घरों की आवश्यकता के अनुरूप पानी जुटाना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
नियमित जलापूर्ति नहीं होने के कारण ग्रामीणों को तालाब की ओर रुख करना पड़ता है। अनेक परिवार तालाब के पानी का उपयोग करते हैं, वहीं पीने के लिए तालाब में बनी मीठे पानी की वेरी से पानी सींचकर घरों तक लाना पड़ रहा है। आधुनिक दौर में घर-घर नल कनेक्शन होने के बावजूद पानी के लिए इस तरह मशक्कत करना ग्रामीणों की विडंबना को उजागर करता है।
ग्रामीणों का कहना है कि केवल टंकी और नल कनेक्शन उपलब्ध करा देना पर्याप्त नहीं है, जब तक नियमित रूप से पर्याप्त मात्रा में पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हो। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग एवं प्रशासन से रूपावास की पेयजल व्यवस्था का स्थायी समाधान कर नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।










