सोजत में सक्षम संस्थान द्वारा निःशुल्क फिजियोथैरेपी केंद्र का शुभारंभ
रिपोर्टर – नवनीत राय ‘रुचिर’, सोजत
सोजत। राजकीय चिकित्सालय के ट्रॉमा भवन में गत तीन वर्षों से दिव्यांगजन के सशक्तिकरण के लिए संचालित सक्षम दिव्यांग सहायता केंद्र में अष्टावक्र जयंती के अवसर पर निःशुल्क सक्षम फिजियोथैरेपी केंद्र का शुभारंभ किया गया। केंद्र का उद्घाटन मुख्य अतिथि भामाशाह अनोप सिंह लखावत, मुकेश कच्छवाह, मोहन देवासी, देवीलाल सांखला, सोहनलाल टॉक, मीना गुप्ता एवं डॉ. राजेश गुप्ता ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया।
कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि मंच पर दिव्यांग बंधु बुद्धाराम पनुसा, राजूराम एवं संगीता देवी को सम्मानपूर्वक स्थान देकर मंच को सुशोभित किया गया। सक्षम केंद्र प्रमुख श्रवण उपाध्याय ने अष्टावक्र जयंती के उपलक्ष्य में महर्षि अष्टावक्र के प्रेरणादायी जीवन पर प्रकाश डालते हुए सोजत क्षेत्र में फिजियोथैरेपी सुविधा की आवश्यकता और उपयोगिता बताई।
फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. हर्षिता चौधरी ने फिजियोथैरेपी की परिभाषा, आवश्यकता तथा इससे रोगियों को होने वाले लाभों की विस्तृत जानकारी दी। भामाशाह अनोप सिंह लखावत ने कहा कि यह निःशुल्क सुविधा दिव्यांगजन के साथ आर्थिक रूप से कमजोर एवं लकवाग्रस्त मरीजों के लिए अत्यंत लाभप्रद सिद्ध होगी।
भारत विकास परिषद के अध्यक्ष देवीलाल सांखला ने निःशुल्क फिजियोथैरेपी केंद्र शुरू करने के लिए सक्षम संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए हरसंभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया। प्रशिक्षु आईएएस प्रेम सिंह मीणा ने सेरेब्रल पाल्सी से ग्रसित लोगों के लिए नियमित फिजियोथैरेपी को अत्यंत आवश्यक बताया। उन्होंने छोटे बच्चों में बढ़ती मोबाइल की लत के संदर्भ में ‘डिजिटल सेरेब्रल पाल्सी’ जैसी गंभीर स्थिति पर भी चिंतन करने का आह्वान किया।
प्रांत सचिव समाजसेवी सुरेश मेवाड़ा ने केंद्र की स्थापना में सहयोग देने वाले सभी भामाशाहों का आभार जताते हुए इसे सोजत क्षेत्र के लिए ‘मील का पत्थर’ बताया। उन्होंने कहा कि इस केंद्र के माध्यम से सोजत क्षेत्र के सेरेब्रल पाल्सी से ग्रसित करीब 25 बच्चों तथा 50 से 60 लकवाग्रस्त जरूरतमंदों को निःशुल्क फिजियोथैरेपी सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
जिला सचिव पंकज सेन ने मंच संचालन करते हुए सक्षम दिव्यांग सेवा केंद्र की गत तीन वर्षों की उपलब्धियों की जानकारी दी। अंत में जिला अध्यक्ष मनोहरलाल जोशी ने सभी अतिथियों, भामाशाहों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने दिव्यांगजन को स्वावलंबी बनाने के लिए चूड़ियों पर नगीने लगाने, कागज की थैलियां तथा चॉक बनाने जैसे रोजगारपरक प्रशिक्षण शुरू करने के आगामी लक्ष्यों की जानकारी भी दी।










