वर्षों से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की बढ़ी चिंता, अचानक पैटर्न बदलने से तैयारी की रणनीति प्रभावित होने की आशंका
जयपुर। राजस्थान में सरकारी कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को RAS की तर्ज पर आयोजित करने की तैयारी की खबर सामने आने के बाद अभ्यर्थियों के बीच नाराजगी देखने को मिल रही है। प्रस्तावित बदलाव के तहत भर्ती प्रक्रिया में प्रारंभिक परीक्षा के बाद वर्णनात्मक मुख्य परीक्षा और उसके बाद साक्षात्कार को शामिल करने पर मंथन किया जा रहा है।
हालांकि अभी यह बदलाव अंतिम रूप से लागू नहीं हुआ है, लेकिन खबर सामने आने के बाद लंबे समय से असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों ने इस प्रस्ताव पर सवाल उठाए हैं।
अभ्यर्थियों का सवाल– तैयारी कर रहे युवाओं का क्या होगा?
अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने वर्तमान परीक्षा व्यवस्था और उपलब्ध पाठ्यक्रम को ध्यान में रखते हुए कई महीनों से अपनी तैयारी की रणनीति बनाई हुई है। ऐसे समय में परीक्षा में नया वर्णनात्मक चरण जोड़ने की तैयारी से उनकी पूरी तैयारी प्रभावित हो सकती है।
अभ्यर्थियों के अनुसार MCQ आधारित परीक्षा और वर्णनात्मक परीक्षा की तैयारी का तरीका पूरी तरह अलग होता है। जहां वस्तुनिष्ठ परीक्षा में तथ्यों, अवधारणाओं और सही विकल्प चुनने पर जोर रहता है, वहीं वर्णनात्मक परीक्षा के लिए उत्तर लेखन, प्रस्तुतीकरण और समय प्रबंधन की अलग से तैयारी करनी पड़ती है।
“विषय ज्ञान परखना है तो पारदर्शी और समान अवसर भी जरूरी”
अभ्यर्थियों का तर्क है कि असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए विषय की गहराई परखना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके लिए परीक्षा पैटर्न में बड़ा बदलाव करने से पहले अभ्यर्थियों को पर्याप्त समय और स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।
उनका कहना है कि यदि वर्णनात्मक परीक्षा लागू की जाती है तो प्रश्नपत्र का स्तर, पाठ्यक्रम, अंकभार, मूल्यांकन पद्धति और इंटरव्यू के वेटेज को पहले से स्पष्ट किया जाना चाहिए।
कॉपी जांच को लेकर भी उठ रहे सवाल
वर्णनात्मक परीक्षा में अभ्यर्थियों की एक प्रमुख चिंता उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में समानता को लेकर है। अलग-अलग परीक्षकों द्वारा कॉपियों की जांच किए जाने पर मूल्यांकन की एकरूपता बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि नए पैटर्न में वर्णनात्मक परीक्षा शामिल की जाती है तो मूल्यांकन की स्पष्ट एवं पारदर्शी व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
अचानक बदलाव के बजाय पर्याप्त समय की मांग
अभ्यर्थियों की मांग है कि यदि सरकार और आयोग भविष्य में परीक्षा पैटर्न बदलने का निर्णय लेते हैं तो इसे अचानक लागू करने के बजाय अगली भर्ती से पर्याप्त समय पहले आधिकारिक रूप से घोषित किया जाए।
साथ ही अभ्यर्थियों ने मांग उठाई है कि नए पैटर्न को लागू करने से पहले अभ्यर्थियों और विषय विशेषज्ञों से सुझाव लिए जाएं, ताकि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और लंबे समय से तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के हित भी प्रभावित न हों।
अभ्यर्थियों की मुख्य मांगें
- परीक्षा पैटर्न में बदलाव से पहले आधिकारिक अधिसूचना जारी हो।
- नए पैटर्न और सिलेबस की स्पष्ट जानकारी दी जाए।
- बदलाव लागू करने से पहले अभ्यर्थियों को पर्याप्त तैयारी का समय मिले।
- वर्णनात्मक परीक्षा होने पर मूल्यांकन की पारदर्शी व्यवस्था हो।
- अंकभार और इंटरव्यू के वेटेज को स्पष्ट किया जाए।
- लंबे समय से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की आपत्तियों और सुझावों पर विचार किया जाए।
फिलहाल असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के पैटर्न में प्रस्तावित बदलाव को लेकर उच्च शिक्षा एवं कार्मिक विभाग स्तर पर मंथन की बात सामने आई है। अंतिम निर्णय नए नियमों को मंजूरी मिलने के बाद ही स्पष्ट होगा।









