पाली/सियाट। वी सोच महाविद्यालय, सियाट में आयोजित भव्य योग एवं स्वास्थ्य सेमिनार में विद्यार्थियों, स्थानीय नागरिकों और गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लेकर इसे सफल बनाया। इस सेमिनार का मुख्य आकर्षण रहे आयुर्वेदाचार्य व आरोग्य भारती संस्था के सचिव डॉ. अखिल व्यास, जिनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सरल भाषा में प्रस्तुत उद्बोधन ने सभी को गहराई से प्रभावित किया।
डॉ. व्यास ने कहा कि “योग आज केवल साधना का विषय नहीं, बल्कि आधुनिक जीवनशैली में स्वस्थ और संतुलित जीवन की अनिवार्य धरोहर है।” उन्होंने बताया कि आज की तेज़, तनावपूर्ण और असंतुलित दिनचर्या में योग और आयुर्वेद हमारे जीवन की रक्षा करने और रोगों से बचाव करने की क्षमता रखते हैं।
योग का वैज्ञानिक महत्व और मानसिक स्वास्थ्य में योगदान
डॉ. व्यास ने विद्यार्थियों को योग के विविध आयाम समझाए। उनका कहना था कि योग केवल शरीर को स्वस्थ नहीं रखता, बल्कि यह मस्तिष्क, मन और चेतना को संतुलित रखकर मानसिक एकाग्रता और सकारात्मक सोच का निर्माण करता है। उन्होंने बताया कि नियमित प्राणायाम, जैसे अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और कपालभाति, से रक्तसंचार में सुधार होता है, फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और तनाव हॉर्मोन कम होते हैं। वे बोले, “युवावस्था में योग और आयुर्वेदिक दिनचर्या अपनाना, भविष्य के संपूर्ण स्वास्थ्य की मजबूत नींव रखता है।”
संतुलित आहार और जीवनशैली पर वैज्ञानिक सुझाव
डॉ. व्यास ने विद्यार्थियों को आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से संतुलित भोजन, समय पर विश्राम और योगाभ्यास के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने जंक फूड, फास्ट फूड और कोल्ड ड्रिंक से दूरी बनाए रखने की चेतावनी देते हुए कहा कि ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं और शुगर, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और पाचन संबंधी समस्याओं के मुख्य कारण बन सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आयुर्वेदिक आहार-विहार अपनाकर व्यक्ति न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ रहता है, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक रूप से भी सुदृढ़ बनता है।
हार्ट अटैक और सीपीआर का व्यावहारिक प्रदर्शन- डॉ. व्यास ने युवाओं को आपातकालीन परिस्थितियों में जीवनरक्षक कौशल की जानकारी दी। उन्होंने हार्ट अटैक की स्थिति में सीपीआर (Cardiopulmonary Resuscitation) करने की प्रक्रिया विस्तार से समझाई और विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल प्रदर्शन के माध्यम से दिखाया। उनका कहना था कि “यह कौशल किसी की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।” विद्यार्थियों ने इस सत्र में सक्रिय भाग लेकर सीपीआर की तकनीक सीखी और जीवन रक्षक ज्ञान प्राप्त किया।
अन्य प्रमुख अतिथियों और कार्यक्रम की झलक- इस अवसर पर कार्यक्रम में उपस्थित थे—पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी व आरोग्य भारती के अध्यक्ष डॉ. हजारीमल चौधरी, वयोवृद्ध योगाचार्य विजय राज सोनी,महाविद्यालय सचिव, एडवोकेट हेरम्ब भारद्वाज ,संरक्षक गोपाललाल शास्त्री, श्याम सुंदर सोनी, प्रोफेसर मोहम्मद आसिफ सर, प्रोफेसर अशोक गहलोत, प्रोफेसर शाहरुख खान, सहायक आचार्य राजेन्द्र कुमावत, प्राध्यापिका भावना बोराणा, भावना गोराणा, कुंदन सिंह गुर्जर, उगम राज, वसीम अहमद आदि सहित वर्तमान एवं पूर्व विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर इसे सफल बनाया एवं अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
कार्यक्रम की शुरुआत में महाविद्यालय के प्राध्यापक पंडित अजय कुमार जोशी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ माँ सरस्वती का पूजन करवाया। महाविद्यालय के सचिव हेरम्ब भारद्वाज और संरक्षक गोपाल लाल शास्त्री ने सभी अतिथियों का माला, शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर गर्मजोशी से स्वागत किया।
इस अवसर पर, सचिव एडवोकेट हेरम्ब भारद्वाज ने योग डिप्लोमा पाठ्यक्रम की विस्तृत जानकारी प्रदान की। सेमिनार से प्रेरित होकर उसी समय पाँच विद्यार्थियों ने इस डिप्लोमा कोर्स में अपना रजिस्ट्रेशन करवा कर प्रवेश सुनिश्चित किया।
कार्यक्रम का सफल मंच संचालन महाविद्यालय के विद्यार्थी दीपक गहलोत (प्रथम सेमेस्टर) ने किया, जिससे सभी लोग आनंदित हुए।

योगाचार्य विजय राज सोनी ने प्राणायाम, ताड़ासन, भ्रामरी, मंडूकासन, भुजंगासन और सूर्य नमस्कार का प्रदर्शन कर उपस्थित लोगों को सक्रिय रूप से अभ्यास करवाया। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने योगाभ्यास की सही तकनीकें सीखकर स्वस्थ जीवन की ओर प्रेरणा पाई।
महाविद्यालय के प्रबंध निदेशक एडवोकेट हेरम्ब भारद्वाज ने इस अवसर पर योग डिप्लोमा कोर्स की जानकारी दी। सेमिनार से प्रभावित होकर पाँच विद्यार्थियों ने उसी दिन इस कोर्स में प्रवेश करवा लिया।
अंत में, महाविद्यालय के प्राध्यापक मोहम्मद आसिफ ने सभी आगंतुकों को महाविद्यालय का संक्षिप्त परिचय दिया और उनके अमूल्य समय के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।










