पाली/सियाट। वी सोच महाविद्यालय सियाट में आयोजित दिवसीय योग सेमिनार ज्ञान, अनुभव और जीवन-उपयोगी कौशलों का संगम बन गया, जिसमें सैकड़ों विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर योग, प्राणायाम, संतुलित आहार और आपातकालीन चिकित्सा तकनीकों की गहन जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण, कुंकुम तिलक और दीप प्रज्वलन के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुई, जिसका नेतृत्व महाविद्यालय के प्राध्यापक पंडित अजय जोशी ने किया और पूरा परिसर श्रद्धा व ऊर्जा से भर उठा।
आरोग्य भारती पाली के सचिव और आयुर्वेदाचार्य डाॅ. अखिल व्यास ने योग के आधुनिक स्वरूप, विद्यार्थी जीवन में इसके महत्व और कॉर्पोरेट संस्कृति में बढ़ती उपयोगिता पर प्रेरक उद्बोधन दिया। उन्होंने बताया कि नियमित योगाभ्यास न केवल मन-मस्तिष्क को शक्ति देता है बल्कि कॉर्पोरेट जगत में बढ़ते तनाव, अवसाद और मानसिक दबाव को दूर कर उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। डॉ. व्यास ने अस्थि व संधि विकार, पाचन तंत्र रोगों, गट–ब्रेन एक्सिस, रसायन चिकित्सा तथा दैवव्यापाश्रयी चिकित्सा पर अपने शोध अनुभव साझा करते हुए यह संदेश दिया कि योग ही वह विज्ञान है जो मनुष्य को उसके मूल आत्मस्वरूप से जोड़कर जीवन में संतुलन और प्रसन्नता लाता है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति स्वस्थ होगा तो परिवार, ग्राम और राष्ट्र — सभी स्वस्थ होंगे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, एमडी फिज़िशियन, पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी बांगड़ अस्पताल तथा आरोग्य भारती पाली के अध्यक्ष डाॅ. हजारीमल चौधरी ने आधुनिक युवा पीढ़ी को सबसे बड़ा खतरा बन चुके फास्ट फूड और कोल्ड ड्रिंक पर तीखी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यह “स्वाद के नाम पर धीमा ज़हर है” जिसमें मिलाए जाने वाले रसायन सीधे-सीधे डायबिटीज, हाई बीपी, कैंसर, मोटापा और पाचन तंत्र की बीमारियों को जन्म देते हैं। शादी–समारोहों से लेकर रोजमर्रा की थाली तक फास्ट फूड की बढ़ती आदत को स्वास्थ्य की सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए उन्होंने आहार–विहार के वैज्ञानिक नियमों को अपनाने पर जोर दिया। उनके सत्र की विशेषता वह क्षण रहा जब उन्होंने अचानक हार्ट अटैक की स्थिति में दिए जाने वाले सीपीआर का पूरे हाल के सामने लाइव डेमो किया, जिसमें कृत्रिम मानव पर छाती दाबन, सांस देने की तकनीक, किनको सीपीआर देना चाहिए, किन्हें नहीं, कितनी गति से देना चाहिए और कौन से संकेत देखकर यह निर्णय लिया जाता है — सबकुछ बच्चों की भाषा में समझाया। उत्साह में उन्होंने विद्यार्थियों को मंकी की तरह हंसाकर शरीर को तनावमुक्त करने का अभ्यास भी कराया।
योग शिक्षा प्रमुख, आरोग्य भारती पाली के वरिष्ठ योगाचार्य विजयराज सोनी, जो गत 25 से 30 वर्षों से लखोटिया उद्यान और विभिन्न सरकारी–सामाजिक मंचों पर योगाभ्यास करवाने के लिए प्रसिद्ध हैं, ने योग सत्र को नया आयाम दिया। उन्होंने अनुलोम–विलोम, कपालभाति, भ्रामरी, भुजंगासन, सूर्य नमस्कार, मंडूकासन और ध्यान मुद्राओं का प्रदर्शन कर विद्यार्थियों को सही तकनीकें सिखाईं। उन्होंने बताया कि योग किसी एक बीमारी का उपचार नहीं बल्कि पूरा शरीर स्वस्थ रखने की प्रणाली है। तनाव, हृदय रोग, पाचन विकार, थायराइड, मधुमेह, पीठ दर्द, मोटापा — इन सभी पर योग चमत्कारिक प्रभाव डालता है। उन्होंने सावधानीपूर्वक यह भी स्पष्ट किया कि हृदय रोगियों, सर्वाइकल और हाई बीपी वाले व्यक्तियों को हलासन, सर्वांगासन आदि आसनों से बचना चाहिए। सत्र के अंत में उन्होंने अपनी प्रसिद्ध “शेर दहाड़” परंपरा करवाई, जिससे पूरा सभागार उत्साह और हँसी से गूंज उठा।
महाविद्यालय के प्राध्यापक मोहम्मद आसिफ ने महाविद्यालय का परिचय देते हुए बताया कि वी सोच महाविद्यालय पहले सोजत में कन्या महाविद्यालय के रूप में संचालित होता था, जबकि अब अपनी स्वयं की भूमि पर सियाट में सह-शिक्षा संस्थान के रूप में बीए कला वर्ग में राजनीति विज्ञान, हिंदी साहित्य, भूगोल, इतिहास, समाजशास्त्र और गृह विज्ञान सहित आगामी सत्र 2026 से एमए भूगोल व इतिहास शुरू किए जाने की घोषणा की गई है। वर्तमान में जगतगुरु रामानंदाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर से संचालित योगा थैरेपी डिप्लोमा की विस्तृत जानकारी भी दी गई।
महाविद्यालय के प्रबंध निदेशक एडवोकेट हेरम्ब भारद्वाज ने सभी अतिथियों — डॉ. अखिल व्यास, डॉ. हजारीमल चौधरी और योगाचार्य विजयराज सोनी — का दुपट्टा, शॉल और मोतियों की माला पहनाकर भारतीय परंपरा के अनुसार अभिनंदन किया। उन्होंने महाविद्यालय की विकास यात्रा और वर्तमान शैक्षिक कार्यक्रमों का विवरण भी प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का मनमोहक मंच संचालन प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थी दीपक गहलोत ने किया, जिसने पूरे आयोजन को जीवंत बनाए रखा।
सेमिनार के प्रभाव से प्रेरित होकर नौ विद्यार्थियों ने तत्काल योगा थैरेपी डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश लिया।
कार्यक्रम में शिक्षा विद् गोपाललाल शास्त्री, श्यामलाल तिवारी, वर्षा तिवारी, देशबंधु, अशोक गहलोत, शाहरुख खान, अजय कुमार जोशी, राजेंद्र कुमावत, भावना बोराणा, भावना गोराणा, कुन्दन सिंह गुर्जर, उगमराज प्रजापत, प्रवीण गर्ग, सीमा सीरवी, मंजू सीरवी समेत अनेक गणमान्यजन और विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ के साथ हुआ।











