महाशिवरात्रि 2026: चार पहर की पूजा के मुहूर्त और महत्व, जानिए पूरी विधि

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हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक महाशिवरात्रि इस वर्ष 15 फरवरी 2026 की शाम से शुरू होकर 15 फरवरी 2026 की सुबह तक मनाई जाएगी। इस पावन रात्रि में भगवान शिव की पूजा चार पहरों में करने का विशेष विधान है। मान्यता है कि विधि-विधान से चारों पहरों की पूजा करने पर भक्त को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।


⏰ चार पहर के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

🔹 प्रथम पहर पूजा

समय: 15 फरवरी, शाम 6:11 बजे से रात 9:22 बजे तक
महत्व: यह संध्या काल (प्रदोष काल) की मुख्य पूजा मानी जाती है।
विधि: शिवलिंग पर दूध और जल की धारा से अभिषेक करें।


🔹 द्वितीय पहर पूजा

समय: 15 फरवरी, रात 9:23 बजे से 16 फरवरी, रात 12:34 बजे तक
महत्व: यह रात्रि के दूसरे भाग की पूजा होती है।
विधि: शिवलिंग पर दही से अभिषेक करना शुभ माना जाता है।


🔹 तृतीय पहर पूजा

समय: 16 फरवरी, रात 12:35 बजे से सुबह 3:46 बजे तक
महत्व: यह मध्यरात्रि की मुख्य पूजा मानी जाती है।
विधि: शिव जी को घी और जल अर्पित करें तथा शिव स्तुति का पाठ करें।


🔹 चतुर्थ पहर पूजा

समय: 16 फरवरी, सुबह 3:46 बजे से 6:59 बजे तक
महत्व: ब्रह्म मुहूर्त तक चलने वाली अंतिम पूजा।
विधि: शिवलिंग पर शहद अर्पित करें और पूजा के बाद आरती करें।


🪔 धार्मिक महत्व

महाशिवरात्रि को शिव-शक्ति के दिव्य मिलन का पर्व माना जाता है। इस रात्रि में विशेष रूप से रात्रिकालीन पूजा का विधान है, जिसे चार पहरों में संपन्न किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत, जप और विधिपूर्वक पूजन करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है।


(यह धार्मिक जानकारी श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखकर प्रकाशित की जा रही है।)

Vartmaan Times
Author: Vartmaan Times

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