सीमा के सुरों और मनदीप की उमंग से सुरमयी हुई सोजत की शाम
973वें स्थापना दिवस पर रामेलाव तालाब किनारे सजी सांस्कृतिक संध्या, रात्रि डेढ़ बजे तक संगीत के रंग में डूबे रहे श्रोता
रिपोर्टर—नवनीत राय ‘रुचिर’
सोजत। राजस्थानी माटी की सौंधी महक लिए लोकगीतों की मिठास और पंजाबी संगीत की उमंग ने शनिवार की शाम ऐतिहासिक नगरी सोजत को सुरों के रंग में रंग दिया। रामेलाव तालाब का किनारा, रोशनी से दमकती किले की प्राचीर और कलाकारों की मनोहारी प्रस्तुतियों से सजी महफिल नगर के स्थापना दिवस के उल्लास की साक्षी बनी। अवसर था सोजत के 973वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में नगरपालिका के तत्वावधान में आयोजित सांस्कृतिक संध्या का। लंबे अंतराल बाद सजी इस सांगीतिक महफिल में श्रोताओं का उत्साह ऐसा उमड़ा कि रात्रि डेढ़ बजे तक भी आयोजन स्थल की रौनक बनी रही।
राजस्थान की स्वर कोकिला एवं हरदिल अजीज गायिका सीमा मिश्रा ने जैसे ही ‘‘केसरिया बालम पधारो म्हारे देश…’’ से सुर साधे, तालियों की गड़गड़ाहट से समूचा परिसर गूंज उठा। उनके स्वर में राजस्थान की आत्मीय मनुहार और लोकजीवन की मिठास सुन श्रोता भावविभोर हो उठे। इसके बाद ‘‘खड़ी नीम के नीचे म्हैं तो एकली…’’, ‘‘नखरालो देवरियो भाभी पर जादू करगो…’’ और ‘‘समदरियो लहराँ लेवे सा…’’ जैसे गीतों की उम्दा प्रस्तुतियों को श्रोताओं ने मुक्तकंठ से सराहा। उनके सुप्रसिद्ध गीतों ‘‘और रंग दे रे म्हाने और रंग दे…’’, ‘‘ओढ़नी ओढू तो उड़ी उड़ी जाय…’’ तथा ‘‘मोरिया आछो बोलियो रे ढलती रात में…’’ पर अतिथि कलाकारों की नयनाभिराम नृत्य प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक संध्या के आकर्षण को और बढ़ा दिया।
दूसरी पारी में युवा दिलों की पसंद पंजाबी गायक मनदीप रमाणा ने मंच संभाला तो महफिल में उमंग की नई लहर दौड़ गई। उनके प्रतिनिधि गीत ‘‘बन्ना ओ कांच केरी चिमनी अंतरियों लैजो तेल…’’ की सुमधुर प्रस्तुति का दर्शकों ने जोरदार तालियों से स्वागत किया। उन्होंने अनेक राजस्थानी लोकगीतों के साथ बाबा रामदेव के प्रसिद्ध गीत ‘‘रुणिचे रा धणिया अजमालजी रा कवराँ…’’ की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को झूमने पर विवश कर दिया। सीमा मिश्रा के गीतों पर अपनी टीम के साथ पंजाबी लहजे में दी गई उनकी मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियां भी दर्शकों को खूब भाईं। राजस्थानी सुरों और पंजाबी अंदाज के इस मेल ने आयोजन को यादगार बना दिया।
समारोह की अध्यक्षता विधायक श्रीमती शोभा चौहान ने की। पूर्व कैबिनेट मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे एवं राजस्थान प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठतम अधिकारी राजेश चौहान मुख्य अतिथि रहे। विशिष्ट अतिथियों में नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती कीर्ति राजेश तंवर, उपाध्यक्ष राकेश पंवार, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामदेव सिंह सान्दू तथा पूर्व चेयरमैन आनंद भाटी व जुगल किशोर निकुम उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के आरंभ में नगरपालिका के अधिशाषी अधिकारी राघव सिंह मीणा, सोजत महोत्सव समिति के अध्यक्ष जोगेश जोशी ‘लक्की’ एवं सभी पार्षदगण ने अतिथियों और प्रमुख कलाकारों का साफा, शॉल, माल्यार्पण तथा स्मृति चिह्न भेंटकर स्वागत-सत्कार किया। आयोजन में सोजत महोत्सव समिति से जुड़े समाजसेवी आनंद भाटी, राजेश तंवर, पुष्पतराज मुणौत, पंकज त्रिवेदी, गौतम तंवर, प्रफुल्ल ओझा, समिति अध्यक्ष जोगेश जोशी एवं सचिव चेतन व्यास आदि का विशेष सहयोग रहा।
सांस्कृतिक संध्या के अंतिम चरण में स्थानीय प्रतिभाओं ने भी अपनी कला की छाप छोड़ी। स्वस्ति ओझा ने कथक नृत्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, वहीं प्रगति पुरूषवाणी ने भजन की प्रस्तुति दी। पुलिस सब इंस्पेक्टर घेवरराम ने ‘‘नदिया किनारे म्हारो गांव…’’ गीत की दमदार प्रस्तुति देकर सभी का दिल जीत लिया।
आयोजन के प्रति नगरवासियों का उत्साह शाम से ही दिखाई देने लगा था। दर्शक सायं सात बजे से रामेलाव तालाब परिसर पहुंचने लगे और लगभग आठ बजे तक सभी कुर्सियां भर गईं। स्वागत-सत्कार के बाद रात्रि नौ बजे सांगीतिक प्रस्तुतियों का सिलसिला शुरू हुआ। पहली पारी में सीमा मिश्रा ने अपने सुरों का जादू बिखेरा, जबकि रात्रि ग्यारह बजे शुरू हुई दूसरी पारी में मनदीप रमाणा ने अपनी गायकी और मंचीय ऊर्जा से महफिल को नई ऊंचाई दी। बैठने का पर्याप्त स्थान नहीं मिलने के बावजूद अनेक दर्शक करीब चार घंटे तक खड़े रहकर प्रस्तुतियों का आनंद लेते रहे। रात्रि डेढ़ बजे तक भी श्रोताओं का उत्साह कम नहीं हुआ और सुरों से बंधी महफिल से उठने का उनका मन नहीं हुआ। नगरपालिका चेयरमैन श्रीमती कीर्ति राजेश तंवर के कार्यकाल की शुरुआत में हुए इस ऐतिहासिक आयोजन को लोग वर्षों तक याद करेंगे।











