जनादेश की चौखट पर फिर खिला कमल, सोजत में बनेगा भाजपा का बोर्ड

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जनादेश की चौखट पर फिर खिला कमल, सोजत में बनेगा भाजपा का बोर्ड

भाजपा को 24, कांग्रेस को 10 और निर्दलीयों को मिली 6 सीटें; अब अध्यक्ष पद के लिए शुरू हुआ सियासी मंथन

रिपोर्टर – नवनीत राय ‘रुचिर’, सोजत 

सोजत। नगरपालिका आम चुनाव-2026 में शहर की जनता ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में स्पष्ट जनादेश दिया है। नगर के सभी 40 वार्डों में भाजपा ने सर्वाधिक 24 सीटों पर विजय प्राप्त कर बहुमत का जादुई आंकड़ा पार कर लिया। इसके साथ ही सोजत नगरपालिका में पुनः भाजपा का बोर्ड बनना तय हो गया है। कांग्रेस 10 सीटों पर सिमट गई, जबकि 6 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत का परचम फहराया।

इस चुनाव में निर्दलीयों की सफलता ने भी राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है। छह निर्दलीय विजेताओं में वार्ड 17 से अमराराम, वार्ड 23 से सुरेशचंद पलोड़ और वार्ड 24 से धर्मिष्ठा रामअवतार भाटी भाजपा के बागी प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतरे थे। तीनों ने पार्टी प्रत्याशियों को चुनौती देते हुए जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक ताकत का अहसास कराया।

नए चेहरों ने भी बनाई पहचान

इस बार के चुनावी समर में कई नए और युवा चेहरे जनसमर्थन की रोशनी में उभरकर सामने आए हैं। भाजपा प्रत्याशियों में वार्ड 29 से जोगेश कुमार जोशी ‘लक्की’ ने सर्वाधिक अंतर से विजय हासिल कर उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। कांग्रेस की ओर से वार्ड 19 में तेबा खान की जीत सबसे बड़ी रही, जबकि निर्दलीय प्रत्याशियों में वार्ड 24 से धर्मिष्ठा रामअवतार भाटी ने सर्वाधिक मतों के अंतर से बाजी मारी।

अध्यक्ष पद के लिए बिछने लगी सियासी बिसात

नगरपालिका अध्यक्ष का पद इस बार अनारक्षित होने से परिणाम घोषित होते ही अध्यक्ष पद को लेकर राजनीतिक कवायद तेज हो गई है। सामान्य वर्ग के आठ प्रत्याशियों के पार्षद निर्वाचित होने के बाद इस वर्ग से अध्यक्ष बनाए जाने की मांग और संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि अनारक्षित पद होने के कारण किसी भी वर्ग का निर्वाचित पार्षद अध्यक्ष पद का दावेदार हो सकता है। पिछले चुनावों के राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भाजपा किस चेहरे पर विश्वास जताती है। आगामी दिनों में अध्यक्ष पद को लेकर दावेदारी, समर्थन और राजनीतिक जोड़-तोड़ का दौर और तेज होने की संभावना है।

भाजपा के विजेता प्रत्याशी

वार्ड 1 से कैलाश, 2 से संजय पंवार, 4 से ललिता, 5 से कन्या देवी, 6 से ओम प्रकाश, 7 से श्यामलाल गहलोत, 8 से निधि ओझा, 9 से टोनू चौहान, 10 से सुधीर दवे, 11 से नरेश सोनी, 12 से प्रकाश, 13 से रेखा, 15 से इरफान, 18 से नासीर खान, 20 से गौतम तंवर, 22 से गंगासिंह सांखला, 25 से नरेंद्र, 27 से जुगल किशोर निकुम, 28 से शोभा, 29 से जोगेश कुमार जोशी ‘लक्की’, 30 से राकेश पंवार, 31 से अर्जुन लोहार, 34 से कीर्ति तंवर तथा वार्ड 39 से राकेश देवड़ा विजयी रहे।

कांग्रेस के विजेता प्रत्याशी

वार्ड 3 से राकेश पंवार, 14 से अमजद खान, 16 से राहुल राठौड़, 19 से तेबा खान, 21 से रेहना परवीन, 26 से रमेशचंद, 32 से बालमुकुंद, 33 से ऐश्वर्या सांखला, 35 से नरेश बबलू तथा वार्ड 38 से मंजू ने जीत दर्ज की।

निर्दलीय विजेता प्रत्याशी

वार्ड 17 से अमराराम, 23 से सुरेशचंद पलोड़, 24 से धर्मिष्ठा रामअवतार भाटी, 36 से प्रमिला, 37 से सज्जन तथा वार्ड 40 से प्रकाश टाक विजयी रहे।

चुनावी परिणामों ने जहां भाजपा के लिए पुनः सत्ता का द्वार खोल दिया है, वहीं कांग्रेस को अपनी रणनीति पर मंथन का संदेश भी दिया है। निर्दलीयों की जीत ने यह भी प्रमाणित किया कि स्थानीय निकाय चुनावों में दलगत पहचान के साथ प्रत्याशी का व्यक्तिगत जनसंपर्क और स्थानीय स्वीकार्यता भी निर्णायक भूमिका निभाती है।

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