“दिवाली से पहले पुष्य नक्षत्र: लक्ष्मी को घर लाने का सर्वश्रेष्ठ अवसर”

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दीपावाली से पहले पुष्य नक्षत्र: लक्ष्मी को घर लाने का सर्वश्रेष्ठ अवसर”

नक्षत्रों का राजा है पुष्य:- 27 नक्षत्रों में आठवां नक्षत्र है पुष्य। इसे नक्षत्रों का राजा भी माना जाता है। यह धन, यश और वैभव का प्रतीक है, इसलिए पुष्य नक्षत्र में शुभ कामों की शुरुआत, प्रॉपर्टी, व्हीकल की खरीदारी और निवेश करने की परंपरा चली आ रही है। माना जाता है इस नक्षत्र में सोना खरीदने से घर में सुख-समृद्धि आती है। पुष्य को सबसे अच्छा नक्षत्र माना जाता है। इसे शास्त्रों में अमरेज्य भी कहा गया है। यानी वो नक्षत्र जो जीवन में स्थिरता और अमरता लाता है। इस दौरान लंबे समय तक चलने वाले स्थायी काम करने चाहिए। इस बार दीपावली से पहले 14 अक्टूबर को पुष्य नक्षत्र का संयोग बन रहा है। यह हर तरह की खरीदारी के लिए सर्वोत्तम दिन माना जाता है। दीपावली से पहले आने से इसका और महत्व बढ़ गया है।

14 अक्टूबर को पुष्य नक्षत्र:-
पुष्य नक्षत्र हर महीने आता है लेकिन दिवाली से पहले आने वाले पुष्य नक्षत्र का विशेष महत्व बताया गया है। इस साल दिवाली से पहले पुष्य नक्षत्र 14 और 15 अक्टूबर 2025 दो दिन है। पुष्य नक्षत्र निवेश, सोना-चांदी, संपत्ति, वाहन खरीदी, बहीखाता नवीनीकरण और दिवाली की खरीदी के लिए अत्यंत लाभकारी होता है। यही वजह है कि दिवाली से पहले लोगों को पुष्य नक्षत्र का इंतजार रहता है। दीवाली के समय स्वर्ण खरीदने के लिये मुहूर्त, अर्थात शुभ समय को प्राथमिकता देते हैं। पुष्य नक्षत्र एवं धनतेरस, ये दो सर्वाधिक शुभ दिन हैं। सोना खरीदना, घर में देवी लक्ष्मी को आमन्त्रित करने के समान माना जाता है. देवी लक्ष्मी धन एवं समृद्धि प्रदान करने वाली देवी हैं। पुष्य नक्षत्र देवी लक्ष्मी का जन्म नक्षत्र है, इसीलिये पुष्य नक्षत्र को देवी लक्ष्मी को घर लाने के लिये सर्वाधिक शुभ नक्षत्र माना जाता है। ऐसे में इस दिन मां लक्ष्मी के रूप में सोना खरीदने की परंपरा है। कहते हैं इसस घर में स्थाई रूप से धन लक्ष्मी का वास हो जाता है।
हर प्रकार की खरीदी शुभ-
पुष्य नक्षत्र में किए गए कार्य पुण्यदायी और फल देने वाले होते हैं। पंचांग के अनुसार, 14 अक्टूबर को दोपहर 11:54 से 15 अक्टूबर को दोपहर 11:59 बजे तक पुष्य नक्षत्र का योग रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पुष्य नक्षत्र 27 नक्षत्रों में से 8 वें स्थान में आता है। पुष्य नक्षत्र की राशि कर्क है। इसे 27 नक्षत्रों में से सबसे शुभ, पुण्य और पवित्र माना जाता है। पुष्य नक्षत्र में खरीदारी करने का प्रचलन है, इसलिए ही इसे शुभ माना जाता है। इस नक्षत्र में चल-अचल संपत्ति जैसे सोने, चांदी के आभूषण, सिक्के, महालक्ष्मी की प्रतिमा, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल्स, फर्नीचर, बाइक-कार, उद्योग के लिए जमीन, प्लॉट की खरीदी सबसे ज्यादा शुभ मानी गई है। साथ ही पुष्य नक्षत्र में निवेश के लिए भी सबसे शुभ माना जाता है।

पुष्य नक्षत्र में इनकी खरीदी स्थायी लाभ:-
अचल संपत्ति – मकान, प्लॉट, फ्लैट, कृषि भूमि और व्यावसायिक संपत्ति।
चल संपत्ति – आभूषणों में सोना, चांदी, हीरा, प्लेटिनम के आभूषण।
ऑटोमोबाइल (चार पहिया वाहन, दोपहिया वाहन),
इलेक्ट्रिक दोपहिया-चार पहिया वाहन।
इलेक्ट्राॅनिक सामान में फ्रिज, टीवी, वॉशिंग मशीन, लैपटॉप, माइक्रोवेव ओवन आदि।

Ajay Joshi
Author: Ajay Joshi

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