पाली। पाली जिले का ऐतिहासिक नगर सोजत अपनी प्राचीन गाथाओं, दुर्गों और विश्व प्रसिद्ध मेहंदी की सुगंध के लिए देश-विदेश में ख्यात है। यह नगर सुकड़ी नदी के किनारे स्थित है और महाभारत काल में त्रंबावती अथवा ताम्रवती नगरी के नाम से जाना जाता था।
पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व-
शास्त्रों में सोजत को शुद्धदंती कहा गया है। यह भूमि देवताओं की क्रीड़ा स्थली और ऋषि-मुनियों की तपोभूमि मानी जाती है। यहाँ से पाषाणकालीन मानव सभ्यता के अवशेष भी मिले हैं।
किंवदंती के अनुसार राजा त्रवणसेन की पुत्री सेजल दिव्य शक्ति की प्रतिमूर्ति थी, जो प्रतिदिन रात्रि में 64 जोगणियों के साथ भाखरी पर्वत पर रम्मत करती थी। सेनापति हुल बान्धर द्वारा उसका पीछा किए जाने पर वह क्रोधित होकर पिता को शाप देकर अंतर्धान हो गई। सेजल की स्मृति में विक्रम संवत 1111 (1054 ई.) में गांव बसाया गया और बाघेलाव तालाब खुदवाया गया।
राजवंशों का उत्थान-पतन-
सोजत पर प्रारम्भिक शताब्दियों में हूण, शक, पल्लव, परमार, सोनगरा चौहान, सिंधल राठौड़ और सोलंकी राजपूतों ने शासन किया। हुल वंश के काल में यहाँ अजवाइन की खेती अत्यंत प्रसिद्ध हुई।
14वीं सदी में मेवाड़ के महाराणा कुंभा ने लगभग 14 वर्षों तक इस क्षेत्र पर शासन किया। बाद में यह नगर पुनः मारवाड़ राज्य में शामिल हो गया।
दुर्ग और स्थापत्य कला-
विक्रम संवत 1517 (1460 ई.) में राव जोधा के पुत्र राव निंबा ने सोजत दुर्ग का निर्माण कराया। इस दुर्ग में 7 दरवाजे—जोधपुरी, राज, जैतारण, नागोरी, चावंडपोल (चांदपोल), रामपोल और जालोरी—तथा 44 बुर्ज आज भी इतिहास की गाथा सुनाते हैं।
यहाँ राव मालदेव और राव चंद्रसेन ने भी राज्य किया। राव चंद्रसेन को “मारवाड़ का प्रताप” और “मध्यकालीन भारत का प्रथम स्वतंत्रता सेनानी” माना जाता है।
आधुनिक पहचान: ग्रीन सिटी-
स्वतंत्रता के बाद सोजत को पाली जिले में सम्मिलित किया गया। आज यह नगर ग्रीन सिटी के नाम से प्रसिद्ध है। विश्व की सर्वाधिक मेहंदी का उत्पादन यहीं होता है, जिससे यह नगर अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुका है।
सोजत महोत्सव की तैयारी-
नगर की स्थापना के 972वें वर्ष पर इस बार भी नवरात्रि के पावन अवसर पर सोजत महोत्सव का आयोजन होगा। महाआरती अनूप सिंह लखावत की पुत्री निधि लखावत द्वारा की जाएगी। इस अवसर पर सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों की धूम रहेगी।
✍️ संकलनकर्ता:-प्रो. डॉ. नीलम सिंह











