*हादसे को न्यौता देते विद्यालय ही नहीं,महाविद्यालय एवं अस्पताल भी !*

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सोजत: 27 जुलाई 2025 रविवार

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सोजत विधानसभा क्षेत्र में इस बारिस से सोजत क्षेत्र में कई सरकारी भवन एवं स्कूल प्रभावित हो रहें हैं जो बड़े हादसों को निमंत्रण भी दे सकते हैं।वर्तमान में सोजत क्षेत्र में जिन सरकारी भवनों स्कूलों के परिसरों में जल भराव की समस्या या छतों से पानी का टपकना,प्लास्टर का गिरना,करंट प्रवाहित होने की संभावना या जर्जर कक्षों के गिरने की स्थिति बनी हुई है उनमें राजकीय महाविद्यालय, राजकीय जिला अस्पताल सोजत,होमियोपैथी अस्पताल, आयुर्वेदिक औषधालय एवं रा.उ.प्रा. संस्कृत विद्यालय सोजत,  राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय  नेहडा बेरा, रा.उ०मा०वि० नंबर 1, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय रायरा कला, आबकारी विभाग सोजत, रा० उ० प्रा० वि०बेरा बन्दिया , रा०उ.० प्रा० वि० रुन्दि‌या , राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय गाड़ोलिया लौहार कालोनी, महात्मा गाँधी राजकीय उ.मा वि. अटबड़ा रा.प्रा.वि० नं. 4 सोजत,सिंचाई विभाग ,विद्युत विभाग, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय खोखरा आदि शामिल हैं। जब तक सिस्टम में सुधार नहीं होगा तब तक सरकारी भवनों में हादसे ऐसे ही होते रहेंगे। हर बार वर्षा के दिनों में अभिभावकों एवं अध्यापकों की जान हलक में ही अटकी रहती है कि कहीं स्कूलों में कोई हादसा घटित नहीं हो जाए । वर्षा के दिनों में छतों का टपकना , प्लास्टर गिरना ,करंट प्रवाहित होना ,विद्युत उपकरणों का क्षतिग्रस्त होना कक्षा कक्षों एवं दीवारों का गिरना गंभीर समस्या बन गया है पाली जिले में दो दर्जन से भी ज्यादा विद्यालय इन समस्यायों से ग्रसित है । यही हालत अन्य सरकारी भवनों का भी हैं।

सोजत राजकीय महाविद्यालय की वर्तमान स्थिति:- सोजत राजकीय महाविद्यालय परिसर में वर्षा के दिनों में जल भराव की समस्या बनी रहती है। साथ ही महाविद्यालय की छतों से पानी का टपकना,प्लास्टर का गिरना, वर्षा के दिनों में करंट प्रवाहित होने की संभावना बनी रहती है। महाविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष हितेश चौहान ने बताया की राजकीय महाविद्यालय सोजत का यही हाल है कक्षाओं की छत बहुत ही दयनीय स्थिति में हैं प्राचार्य महोदयजी से निवदेन किया तो बजट नहीं है इसका हवाला देकर अनदेखा कर रहे हैं।

सोजत के राजकीय जिला अस्पताल:- सोजत के राजकीय जिला अस्पताल के अन्दर के भवन की दीवारों एवं छत्तों की भी यहीं स्थिति है। जहाँ सैकड़ों मरीज एवं उनके परिजन तथा चिकित्सा स्टाफ उपस्थित रहता है। दीवारों में सीलन एवं पानी टपकता है। विद्यालयों में मरम्मत एवं रख-रखाव का कार्य एसएमसी एवं एसडीएमसी के जिम्मे डाल दिया गया है जबकि उनके पास खर्च करने के लिए राशि भी उपलब्ध नहीं रहती है । जो कार्य सार्वजनिक निर्माण विभाग ,नगर पालिका ,समग्र शिक्षा एवं पंचायतों को करना चाहिए वहीं कार्य एसएमसी एसडीएमसी के जिम्मे डाल दिया गया है। , जिन्हें न तो तकनीकी जानकारी हीं है और न ही उनके पास इतना समय भी है व न ही उनके पास खर्च करने योग्य राशि ही उपलब्ध रहती है। विद्यालयों में राजस्थान प्राथमिक शिक्षा परिषद् जयपुर समग्र शिक्षा विभाग से सीएसजी की जो राशि जारी की जाती है वो भी ऊँट के मुँह में जीरा जितनी ही हैं। 1 से 50 छात्रों के नामांकन पर 25 हजार की राशि तीन किश्तो में जारी होती है उसमें से भी बिजली, पानी बिल साफ श सफाई , समाचार पत्र झाडू स्टेशनरी आदि खरीदने के बाद शेष राशि से मरम्मत के काम करवाना असंभव है दूसरी ओर प्रक्रिया की जटिलता के चलते कमी कभी तो ये राशि सत्र समापन तक पहुंच पाती है,जैसा कि गत सत्र में 31 मार्च तक पहुंची थी‌ । ऐसे में आवश्यक कार्य अधुरे ही रह जाते है। यही नहीं स्कूलों में स्टाफ की भारी कमी पाठ्‌य पुस्तको के अक्टूबर तक पहुंच पाना भी समस्या पैदा करता है । जब तक इस सिस्टम में सुधार नहीं होगा स्कूलों में हादसे ऐसे ही होते रहेंगे।

इनका कहना:- श्रीमती शोभा चौहान विधायक:-* मुख्यमंत्री भजन लाल जी शर्मा के अआदेशानुसार विधायक कोष से 20 प्रतिशत राशि स्कूलों की मरम्मत के लिए दी जाएगी मैने अपने विधानसभा क्षेत्र की क्षतिग्रस्त्त व छत टपकने वाली स्कूलों की सूची मंगवाली हैं।

मासिगाराम जांगिड़ उपखंड अधिकारी:- माननीय मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार क्षतिग्रस्त जर्जर भवनों का भौतिक निरीक्षण कर उन्हें सील करने का कार्य किया जा रहा हैं।

महेश गहलोत वरिष्ठ नागरिक :– क्षतिग्रस्त विद्यालयों में मरम्मत का कार्य एसएमसी, एसडीएमसी की बजाय पीडब्ल्यूडी,नगर पालिका, पंचायतों एवं समग्र शिक्षा विभाग के तकनीकी कार्मिकों को दिया जाना चाहिए स्कूलों में पाठ्य पुस्तकें तुरंत पहुंचे।

Ajay Joshi
Author: Ajay Joshi

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