*जनकवि कैलाश दान चारण का असामयिक निधन, साहित्य जगत में शोक की लहर*

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

सोजत। मारवाड़ के लोकप्रिय जनकवि कैलाश दान चारण (75 वर्ष) के असामयिक निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। राजस्थानी काव्य शैली और लोकधर्मी गीतों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले चारण देशभर के कवि सम्मेलनों में एक जाना-माना नाम थे।

पूर्व काबिना मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे ने कहा कि चारण ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में चेतना जागृत की। उन्होंने बिखरते परिवारों, बाल विवाह, बालिका शिक्षा और पर्यावरण जैसे मुद्दों को अपनी रचनाओं में अत्यंत प्रभावशाली रूप से उठाया। दवे ने उनके निधन को समाज के लिए “अपूरणीय क्षति” बताया।

वरिष्ठ नागरिक समिति के अध्यक्ष सुरेश ओझा ने बताया कि चारण समसामयिक विषयों को लेकर सदैव जागरूक रहते थे। वहीं चारण गढ़वी इंटरनेशनल फाउंडेशन सोशियो के अध्यक्ष अनोपसिंह लखावत ने कहा कि उन्होंने समाज के हर तबके की पीड़ा, महिला सशक्तिकरण और बालिका शिक्षा को अपनी कविताओं में स्वर देने का कार्य किया।

अपनी प्रसिद्ध रचनाओं ‘सपुत बेटा कपूत बेटा’, ‘बिंद राजों छोटो गणों’, ‘गोविन्द बोलो हरी गोपाल बोलो’ आदि के माध्यम से उन्होंने क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय मंचों पर खूब लोकप्रियता अर्जित की। वे राजस्थान के लोकप्रिय लोकगीतकेसरिया बालम आवो नी पधारो म्हारे देस’ को महिला एवं पुरुष—दोनों स्वर में गाने के लिए भी विशेष रूप से जाने जाते थे। उनके फिल्मी गीतों पर आधारित पैरोडियाँ भी दर्शकों में खूब सराही गईं।

चारण ने वसुंधरा राजे, अशोक गहलोत, पूर्व मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे सहित अनेक जनप्रतिनिधियों के समक्ष अपनी काव्य प्रस्तुति से विशिष्ट पहचान बनाई। वे राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक योजनाओं—जैसे महिला सशक्तिकरण, बालिका शिक्षा और साक्षरता अभियान—से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे। स्कूली बच्चों में भी उनकी रचनाएँ अत्यंत लोकप्रिय थीं।

उनके निधन पर सोजत की अनेक सामाजिक संस्थाओं, साहित्यकारों, पत्रकारों और जनप्रतिनिधियों ने गहरा शोक व्यक्त किया। संवेदना व्यक्त करने वालों में पूर्व काबिना मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे, बाजरंग सिंह, लेखराज सिंह, वरिष्ठ कवि वीरेंद्र लखावत, सुरेश ओझा, अनोपसिंह लखावत, गोरधन लाल गहलोत, चेतन व्यास, श्याम लाल व्यास, अरुण जोशी, कैलाश गहलोत, ओम नारायण पाराशर, प्रकाश राठौड़, अजय जोशी, हैरंभ भारद्वाज, अकरम खां, मीठालाल पंवार, पंकज त्रिवेदी, उमा शंकर द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हैं।

साहित्य और लोकसंस्कृति की दुनिया में अमिट छाप छोड़ने वाले जनकवि कैलाश दान चारण का योगदान सदा स्मरणीय रहेगा।

Ajay Joshi
Author: Ajay Joshi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें