सोजत: अजय कुमार जोशी। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद जया भादुड़ी द्वारा विवाह को “पुरानी परंपरा”, “गलती” और “बिना शादी जीवन का आनंद लेने” जैसी कथित टिप्पणियों ने सामाजिक व धार्मिक संगठनों में तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। समाज के प्रबुद्ध वर्ग का कहना है कि ऐसे बयान न केवल भारतीय संस्कृति पर कुठाराघात हैं, बल्कि नई पीढ़ी को भ्रमित कर सामाजिक ढांचे को कमजोर करने का प्रयास भी हैं।
कई सामाजिक प्रतिनिधियों ने कहा कि विवाह भारतीय संस्कृति की मूल धुरी है, जो परिवार, परंपरा और सामाजिक स्थिरता को मजबूती प्रदान करती है। उन्होंने ऐसे बयानों को “सनातन रीति-रिवाजों को बदनाम करने की सुनियोजित कोशिश” बताते हुए विरोध दर्ज कराया।
समाज के एक प्रमुख प्रवक्ता ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी से आग्रह किया कि विवाह योग्य युवक-युवतियों के रिश्तों को प्रोत्साहन और मार्गदर्शन देने को प्राथमिकता बनाई जाए। उनका कहना है कि आर्थिक संपदा बढ़ाने से अधिक महत्वपूर्ण है कि समाज की असली संपत्ति—हमारे युवा—सुरक्षित और सुदृढ़ भविष्य की ओर बढ़ें।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते समाज जागरूक नहीं हुआ, तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं, और स्थिति वैसी हो सकती है जैसी कुछ समुदायों में देखी जा रही है, जहाँ विवाह योग्य युवक-युवतियों की संख्या तेजी से घट रही है।
वक्ताओं ने दृढ़ता से कहा कि जया भादुड़ी जैसी हस्तियों द्वारा दिए जा रहे गैर-जिम्मेदाराना बयान सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करते हैं, इसलिए समाज को सजग होकर ऐसे विचारों का विरोध करना चाहिए।
समाज के वरिष्ठों का स्पष्ट संदेश है कि विवाह भारतीय संस्कृति की रीढ़ है—इसे कमजोर करने का हर प्रयास, चाहे वह किसी भी रूप में आए, समाज को दिशा भटकाने वाला है।










