नई दिल्ली के दिल में दहशत फैलाने वाली बम ब्लास्ट घटना ने सिर्फ़ शहर की रफ़्तार नहीं रोकी, बल्कि इंसानियत के मुंह पर एक गहरा तमाचा जड़ दिया । भारतीय जांच एजेंसी की तेज़, सटीक और पुख़्ता पड़ताल ने दहशतगर्दों की उस दुनिया को उजागर किया, जहाँ मासूमियत के चेहरे लगाए लोग नरक का कारोबार करते मिले ।
“जो शहर में आकर खून की होली खेलते हैं,
वो इंसान नहीं वक़्त के सबसे काले सच कहलाते हैं ।”
जांच में सामने आया कि इस हमले के केंद्र में बुरहान, एक ऐसा चेहरा था जिसे देखकर कोई भी सोच सकता था कि वह एक टीचर का बेटा है शिक्षा की भूमि में जन्मा, पर जहन में जहालत का ज़हर भरा हुआ ।
दूसरी तरफ़ एक और नाम सामने आया एक डॉक्टर का बेटा, जिसका पिता ज़िंदगियाँ बचाता रहा, और वह ज़िंदगियाँ लूटता रहा। यही विरोधाभास सबसे बड़ा दर्द है ।
“कुछ चेहरे किताबों से जुड़े हुए लगते हैं,
पर दिल में बारूद भरा हुआ रखते हैं ।”
भारतीय एजेंसी की कार्रवाई ने ये साफ़ कर दिया कि आतंकवाद का कोई धर्म, कोई जाति, कोई तबका नहीं होता बस एक ही पहचान होती है: विनाश । जांच में मिले डिजिटल सबूत, गुप्त चैट्स, विदेशी फंडिंग के लिंक और हथियारों के नेटवर्क ने इस ऑपरेशन को और भी खतरनाक साबित कर दिया ।
“जो मौत को बिज़नेस बनाकर बेचते हैं, उन्हें इंसानियत का कर्ज़ कभी माफ़ नहीं करता ।”
जांच दल ने आतंकी मॉड्यूल की कमर तोड़ते हुए वह सब सामने रखा, जिसे छिपाने की कोशिश दहशतगर्दों ने सालों से कर रखी थी ।
कई ऐसे युवक शामिल पाए गए जिनकी जिंदगी में एक तरफ़ घर की उम्मीदें थीं, और दूसरी तरफ़ कट्टरपंथियों का जहर, जिसने उन्हें इंसान से हैवान बना दिया । इस ब्लास्ट ने देश के सामने यह प्रश्न भी खड़ा किया, क्या कोई शिक्षा, कोई पेशा, कोई घर इतना असुरक्षित हो सकता है कि वहाँ से दहशत का बीज पनपे ❓ जवाब कड़वा है हां यदि समाज मौन रहे, और कट्टरता ऊंचे स्वर में बोलती रहे ।
“खामोशी अगर सच के खिलाफ़ खड़ी हो जाए, तो संभल जाना
क्योंकि वही खामोशी कल किसी शहर को जला सकती है ।”
आज जब जांच एजेंसी ने इन काले चेहरों को बेनकाब किया है, तो यह सिर्फ़ सफलता नहीं, बल्कि चेतावनी है इस देश की मिट्टी में आतंकवाद बोने वालों को जड़ से उखाड़ने का समय आ चुका है ।
क्योंकि भारत नरमी वाला देश है, कमज़ोरी वाला नहीं ।
राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत स्थानीय प्रशासन व हेल्पलाइन पर साझा करें ।
✍️विशेष संवाददाता- अकरम खान पाली की रिपोर्ट










