पाली। ✍️ ख़बरों पर नज़र सच के साथ वर्तमान टाईम्स
SIR आवेदन : आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा का संकल्प- यह बात यह बात जितनी सरल दिखाई देती है, उतनी ही गहरी है।
इस नाचीज़ का यह संदेश बिल्कुल सही दिशा में जाता है आज की एक लापरवाही कल कई पीढ़ियों की मुश्किल बन सकती है।
आज हम अपने बड़ों के नाम 2002 की मतदाता सूची, विधानसभा क्षेत्र की संख्या, या भाग संख्या के कागजों में ढूंढते फिर रहे हैं।
कभी-कभी कई घंटे एक ही सवाल पर अटक जाते हैं
“नाम है या नहीं ❓”
ज़रा सोचिए…
आज जो परेशानी हमें हो रही है,
कल हमारी नस्लें भी इन कागज़ों में हमारा नाम यों ही ढूंढती फिरें

क्या ये हम चाहेंगे❓
“कागज़ों में जो नाम रह जाए वही पहचान बनती है,
लापरवाही की एक लकीर कई पीढ़ियों पर सज़ा बनती है।”
भविष्य में यदि आपकी आने वाली पीढ़ियों को SIR-2025 की लिस्ट में आपका नाम नहीं मिला, तो कितनी बड़ी दिक्कत खड़ी हो सकती है नागरिकता सत्यापन, सरकारी लाभ, पहचान प्रमाण,
सब कुछ कठिन होता चला जाएगा। और तब…
हमारी ही नस्लें सोचेंगी
“क्या हमारे बड़ों ने सही समय पर अपना नाम दर्ज नहीं करवाया❓”
इसीलिए इसे सिर्फ ‘एक वोट’ मत समझना…
यह सिर्फ मतदान का अधिकार नहीं,
यह आपकी पीढ़ियों की सुरक्षा, आपकी वंशावली की पहचान,
और आपके परिवार की आने वाली जरूरतों का आधार है।
“वोट सिर्फ अधिकार नहीं, यह कल की दस्तक है,
आज किया कर्म ही कल की नस्लों का रक्षक है।”
SIR फार्म जिम्मेदारी का सबसे महत्वपूर्ण कदम-
SIR के लिए आवेदन करना सिर्फ एक फॉर्म भरना नहीं यह अपनी आने वाली पीढ़ियों को कागजी संघर्षों से मुक्त करने का वचन है।
आधार के अनुसार सही डाटा भरें-
अपने वार्ड के बीएलओ/बीट इंचार्ज को समय पर जमा करवाएं
परिवार के हर सदस्य का नाम सुनिश्चित करें
पड़ोसियों, रिश्तेदारों, गांव-गली सभी को प्रेरित करें-
“किसी का नाम छूट ना जाए”—
यही सबसे बड़ा सामाजिक योगदान है।
“चिंगारी से उजाला बनता है, जागरूकता से कल सुरक्षित रहता है,
हम आज जो कदम उठाएंगे, वही हमारी नस्लों का भविष्य कहता है।”
हमारी सामूहिक जिम्मेदारी
आज ज़रूरी ये नहीं कि हम केवल अपना फॉर्म भरें-
ज़िम्मेदारी यह भी है कि हम अपने गांव, कस्बा, शहर,मोहल्ले, रिश्तेदारी, समाज के हर व्यक्ति तक यह जागरूकता पहुंचाएं।
यह समय साथ-चलने का है,
न कि किसी को पीछे छोड़ देने का।
किसी को जानकारी नहीं है तो समझाएं
किसी को दिक्कत है तो हाथ बंटाएं
किसी का दस्तावेज़ गलत है तो दस्तावेज में संशोधन करवाने में मदद करें
किसी बुज़ुर्ग को ले जाना है तो साथ जाएं यही इंसानियत है, यही सामाजिक शक्ति।
आज SIR फार्म भरना एक औपचारिकता नहीं यह भविष्य की सुरक्षा है।
यदि आज हम जागरूक रहे,
तो आने वाली नस्लें हमें गर्व से याद करेंगी, न कि सवालों के बोझ से।
“अपनी पीढ़ियों को कागजों में खोया हुआ मत छोड़िए…
आप जागिए, अपनों को जागरूक बनिए,
और दूसरों को भी जगाइए।
✍️पाली से अकरम खान की वर्तमान टाईम्स न्यूज़ पर विशेष रिपोर्ट










