*राजस्थानी रौब ने जीता पुष्कर – मूंछ प्रतियोगिता में विक्रमसिंह जैतावत बने दूसरे नंबर के शहंशाह,भैंसाना के खिलाड़ी और शिक्षक विक्रमसिंह की अनोखी मूंछों पर थमी सबकी नज़र*

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पुष्कर/पाली/ सोजत:अजय कुमार जोशी। राजस्थान की धरती पर जब

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संस्कृति के रंग एक साथ बिखरते हैं, तो वह दृश्य होता है अन्तर्राष्ट्रीय पुष्कर मेले का। ऊँटों की थिरकती चाल, लोकनृत्य की धुनें और राजस्थान की रजवाड़ी शान के बीच इस बार सभी की नज़रें ठहर गईं सोजत क्षेत्र के भैंसाना गांव के निवासी विक्रमसिंह जैतावत पर।

रंग-बिरंगी पगड़ी, शाही दाढ़ी-मूंछ, भारी-भरकम गहनों और पारंपरिक परिधान में सजे विक्रमसिंह जब मंच पर उतरे, तो दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट ने पूरे मैदान को गूंजा दिया। पुष्कर मेले में आयोजित मूंछ प्रतियोगिता में उन्होंने अपने शानदार व्यक्तित्व और परंपरागत अंदाज़ से द्वितीय स्थान प्राप्त कर सोजत और पाली जिले का नाम रोशन किया।

विक्रमसिंह जैतावत न केवल सांस्कृतिक रूप से सक्रिय हैं, बल्कि पेशे से एक शारीरिक शिक्षक भी हैं। उन्होंने खेल के क्षेत्र में भी कई उपलब्धियाँ हासिल की हैं — वे कई राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं और एक राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी रह चुके हैं। शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले विक्रमसिंह ने इस बार संस्कृति की दुनिया में भी अपनी पहचान दर्ज करवाई।

उनकी जीत की खबर गांव पहुंचते ही भैंसाना में खुशी और गर्व का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर उनका स्वागत किया, मालाएं पहनाकर उनका अभिनंदन किया और मिठाइयाँ बाँटीं।

पुष्कर मेला विश्वप्रसिद्ध आयोजन है, जहाँ हर साल देश-विदेश से हजारों लोग राजस्थान की समृद्ध परंपरा, पशु मेले, लोक संगीत और कला को देखने पहुँचते हैं। इस मेले की मूंछ प्रतियोगिता राजस्थान के गौरव और पुरुषत्व का प्रतीक मानी जाती है। इस बार विक्रमसिंह जैतावत की शानदार मूंछें और राजस्थानी ठाठ-बाट इस प्रतियोगिता की सबसे यादगार झलक बन गईं।

Ajay Joshi
Author: Ajay Joshi

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