सोजत। अजय कुमार जोशी। 14 सितंबर हिंदी दिवस “भाषा समय के साथ स्वयं को गढ़ती रहती है और मानव को अपनी भावनाएँ व्यक्त करने का अवसर देती है। इसी क्रम में हिन्दी आज सम्प्रेषण की सबसे सशक्त भाषा बनकर जन-जन तक पहुँच रही है।” यह विचार आचार्य माधव शास्त्री ने हिन्दी दिवस के अवसर पर व्यक्त किए।
शास्त्री ने कहा कि हिन्दी ने अंग्रेज़ी, फ़ारसी, उर्दू और संस्कृत जैसी भाषाओं को आत्मसात कर अपने स्वरूप को समृद्ध बनाया है। यही कारण है कि आज अंग्रेज़ीनिष्ठ हिन्दी, फ़ारसीनिष्ठ हिन्दी, उर्दूनिष्ठ हिन्दी और संस्कृतनिष्ठ हिन्दी—सभी रूपों में इसका प्रभाव दिखाई देता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि हिन्दी अब केवल भारत की ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी समझी जाने वाली भाषा बन चुकी है।
उन्होंने आगे कहा कि हिन्दी को नई ऊँचाइयाँ दिलाने में टीवी, रेडियो, फ़िल्में, अख़बार, न्यूज़ चैनल और प्रवासी भारतीयों की अहम भूमिका रही है। यहाँ तक कि ग्रामीण क्षेत्र भी अब संचार का माध्यम हिन्दी को चुन रहे हैं।
हिन्दी दिवस पर आह्वान करते हुए शास्त्री ने कहा—“संचार साधनों और तकनीक में हिन्दी का अधिक प्रयोग होना चाहिए, ताकि यह भाषा आने वाली पीढ़ियों को जोड़ने वाली राष्ट्रीय एकता की धारा बनी रहे।”










