*सोजत में बढ़ती आत्महत्याएं बनीं चिंता का कारण, महोत्सव समिति चलाएगी जन-जागरूकता अभियान,सामाजिक ताने-बाने में बढ़ता मानसिक दबाव, युवा वर्ग सबसे अधिक प्रभावित*

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सोजत, 19 अगस्त | संवाददाता: अजय कुमार जोशी 

सोजत क्षेत्र में आत्महत्याओं की लगातार बढ़ती घटनाओं ने स्थानीय समाज को गहरे सोचने पर मजबूर कर दिया है। जनवरी से अगस्त 2025 के बीच आधा दर्जन से अधिक आत्महत्याएं सामने आई हैं, जिनमें फांसी लगाना, विषाक्त पदार्थों का सेवन तथा जल समाधि जैसे तरीके शामिल हैं।

समस्या की गंभीरता को देखते हुए सोजत महोत्सव समिति ने इस मुद्दे को सामाजिक स्तर पर उठाने का निर्णय लिया है। बीते दिनों उम्मेद गौशाला में आयोजित बैठक में समिति के सदस्य, समाजसेवी व पार्षद श्री जोगेश ‘लक्की’ जोशी ने कहा कि यह केवल आंकड़ों की बात नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य दांव पर है।

समस्याओं की जड़: प्रतियोगिता, बेरोजगारी,अकेलापन

बैठक में मौजूद प्रबुद्धजनों का मानना है कि आज का युवा असीमित महत्वाकांक्षाओं, बेरोजगारी, पारिवारिक दबाव, मोबाइल की लत और संवादहीनता के बीच फंसकर मानसिक रूप से टूट रहा है।
इस अवसर पर समाजसेवियों ने आमजन से अपील की कि:-

बच्चों और युवाओं को अकेलापन महसूस न होने दें

घर का माहौल सहयोगात्मक और संवादपूर्ण बनाएं

मोबाइल के अत्यधिक उपयोग पर नियंत्रण रखें

पढ़ाई और करियर को लेकर अनावश्यक दबाव न डालें

किसी सदस्य का व्यवहार बदला हुआ लगे तो संवेदनशील होकर संवाद करें

📢एक माह तक चलेगा जन-जागरूकता अभियान:- समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि आगामी एक माह तक सोजत क्षेत्र में जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जिसमें विभिन्न सामाजिक संस्थाएं, स्कूल, कॉलेज और मोहल्ला स्तर पर संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे।

बैठक में उपस्थित प्रमुख व्यक्ति:- भामाशाह अनोपसिंह लखावत, पेंशनर्स समाज अध्यक्ष लालचंद मोयल, सोजत सेवा मंडल मंत्री पुष्पत राज मुणोत, वरिष्ठ नागरिक समिति से सत्यनारायण गोयल, अभिनव कला मंच सचिव चेतन व्यास, उपाध्यक्ष श्यामलाल व्यास, भारत विकास परिषद के रामस्वरूप भटनागर, ताराचंद सैनी, मानव सेवा समिति अध्यक्ष राजेश अग्रवाल, सत्तु सिंह भाटी, अशोक सैन, रशीद गोरी, राजकुमार चौधरी, जवरीलाल बौराणा, कृष्णा भाटी सहित कई गणमान्य नागरिकों ने इस सामाजिक सरोकार में भागीदारी निभाई।

👨‍⚕️ विशेषज्ञ की राय: लक्षणों को न करें अनदेखा:- प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश गुप्ता ने बताया कि आत्महत्या की प्रवृत्ति कई मानसिक एवं सामाजिक कारणों से उत्पन्न होती है। जोखिम बढ़ाने वाले मुख्य कारणों में शामिल हैं:

पूर्व आत्महत्या प्रयास

पारिवारिक इतिहास में आत्महत्या

रिश्तों में विफलता, नौकरी का नुकसान या करीबी की मृत्यु

लंबे समय तक बना तनाव या मानसिक बीमारी

उन्होंने कहा, “यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से परेशान, चुपचाप या सामाजिक रूप से अलग दिखे, तो उसे गंभीरता से लें। उसके साथ संवाद करें, मदद की पेशकश करें और आवश्यक हो तो मनोचिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

💬 एक सवाल, एक जीवन बचा सकता है:- यदि आपको लगता है कि कोई करीबी मानसिक संघर्ष से जूझ रहा है — तो संवाद करें।
“क्या तुम ठीक हो?”, “क्या तुम मुझसे बात करना चाहते हो?” जैसे प्रश्न जीवन रक्षक साबित हो सकते हैं।

🧭 समाज के लिए संदेश:- सोजत महोत्सव समिति का यह कदम न केवल एक जागरूक प्रयास है, बल्कि पूरे समाज को यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम सच में अपने बच्चों को सुन रहे हैं?

अब समय आ गया है कि हम मौन को संवाद में, दबाव को समझ में और तनाव को सहारे में बदलें।

📌 समाचार संपादक – वर्तमान टाईम्स (अजय कुमार जोशी)
🖊️ सम्पर्क: 9461939087

Ajay Joshi
Author: Ajay Joshi

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