🌹आईना 🌹
एक अधूरी आस्था है, वृद्ध ये विश्वास है।
मन जिसे जो मान लें,
बात वो ही खास है।।
भोर भाती भामिनी,
रूप रस योवन हरी।
देखना दुष्कर है देखो,
कलश कर रीति धरी।।
उम्र का ही आईना है,
उम्र का ही रास है।
मन जिसे जो मान लें,
बात वो ही खास है।।
नेह की नदियां सभी,
शिखर से सजती रही।
छोड़ सारा आसरा ,
राह रथ रचती रही।।
दल दली दुनिया मिली,
अधर उत आकाश है।
मन जिसे जो मानले,
बात वो ही खास है।।
कर्ज में डूबीं हुई, किश्तों की कहानियां।
मध्य रात्रि दीप दहके, हे निपट विरानिया।।
फिर उनिंदी आस पर, बसंत बस विश्वास है।
मन जिसे जो मान लें, बात वो ही खास है।।
🌹बसंत 🌹










