जोधपुर। मनुष्य अपने विनम्र व्यवहार, संस्कारों एवं मिलनसारिता से जो छवि समाज में स्थापित करता है, वही उसके जाने के बाद लोगों को उसकी कमी का गहरा एहसास कराती है। यह विचार पूर्व कैबिनेट मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे ने श्रीमाली ब्राह्मण समाज के पुरोधा एवं शिक्षाविद दयाशंकर ओझा के स्वर्गवास पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में व्यक्त किए।
श्रीनाथ कॉलोनी मोड, भट्टा पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए लक्ष्मीनारायण दवे ने कहा कि मनुष्य की देह नश्वर है, जबकि आत्मा अजर-अमर होती है। इंसान इस संसार से चला जाता है, परंतु उसके द्वारा किए गए सद्कर्म, आदर्श जीवन और समाज के लिए किए गए कार्य सदैव स्मरणीय रहते हैं। उन्होंने दयाशंकर ओझा के शिक्षाक्षेत्र एवं समाजसेवा में दिए गए योगदान को अनुकरणीय बताते हुए उन्हें एक आदर्श व्यक्तित्व बताया।
श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित समाजजनों ने दिवंगत आत्मा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा दो मिनट का मौन रखकर आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
इस अवसर पर राजेंद्र प्रसाद, ललित कुमार, मोहक, जयंतीलाल त्रिवेदी, हितेंद्र व्यास, महेंद्र कुमार ओझा, चेतन व्यास, पंकज त्रिवेदी, चंद्रशेखर व्यास, रमेशचंद्र त्रिवेदी, धीरेन्द्र व्यास, चंद्रशेखर श्रीमाली, धर्मेंद्र व्यास, कैलाश दवे, जोगेश जोशी, हरीश व्यास, जितेंद्र व्यास, चंद्रप्रकाश, महेंद्र ओझा (पाली), दाउलाल व्यास, अरविंद कुमार जोशी, किशोर कुमार, अनिल ओझा, अशोक देवेंद्र ओझा, शर्मा, सुदीप व्यास, सुरेंद्र जोशी, मनोज जोशी, गोपाल दवे, नवनीत राय रूचिर, वीरेंद्र सिंह लखावत, मांगीलाल, भवानी शंकर, भगवतीलाल, राहुल त्रिवेदी, गोपाल सिंह, प्रकाश सोनी, अश्विनी कुमार जोशी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
सभा में वक्ताओं ने दयाशंकर ओझा के सरल, सादगीपूर्ण एवं समाजसेवी जीवन को याद करते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।










