जयपुर। राजस्थान में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग ने दोहरे नामांकन (Double Admission) पर कठोर रुख अपनाया है। ऐसे मामलों में अब निजी विद्यालयों को किसी 
भी प्रकार का शुल्क पुनर्भरण (Fee Reimbursement) नहीं दिया जाएगा,
क्योंकि सरकार एक विद्यार्थी के लिए केवल एक ही प्रवेश को मान्यता देती है जो कि भौतिक सत्यापन के उपरांत सुनिश्चित किया जाता है।
“सच की राह पर चलो, तो सफ़र आसान होता है,
फरेब के रास्तों पर हमेशा नुकसान होता है…”
आर टी ई भौतिक सत्यापन पारदर्शिता की मजबूत प्रक्रिया
फर्जी व दोहरे प्रवेश को रोकने के लिए राजस्थान सरकार ने निजी विद्यालयों में आरटीई छात्रों का नियमित भौतिक सत्यापन प्रारंभ किया है।
इस कार्य हेतु जिला स्तरीय सत्यापन टीमें गठित की जाती हैं।
टीमें विद्यालय में उपस्थित होकर विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति, दस्तावेज एवं आधार विवरण का मिलान करती हैं।
सत्यापन के दौरान आधार आधारित डेटा से यह स्पष्ट हो जाता है कि विद्यार्थी पहले से किसी सरकारी विद्यालय में नामांकित है ।
या
उसने निजी विद्यालय में आरटीई के तहत प्रवेश ले रखा है।
यदि एक ही बच्चा सरकारी विद्यालय एवं गैर-सरकारी विद्यालय दोनों में नामांकित पाया जाता है, तो इसे दोहरे नामांकन की श्रेणी में दर्ज किया जाता है।
“हक़ की लड़ाई में कदम डगमगाए नहीं करते,
जो सच के सिपाही हों, वो झुक कर आए नहीं करते…”
ऐसे मामले सामने आने पर निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, बीकानेर के स्तर से विशेष जांच दल गठित किया जाता है।
यह दल संपूर्ण तथ्यात्मक स्थिति का निरीक्षण कर वास्तविक जिम्मेदार पक्ष की पहचान करता है।
यदि पाया जाता है कि किसी निजी विद्यालय ने आर्थिक लाभ के लिए फर्जी या दोहरे प्रवेश किए हैं, या किसी सरकारी विद्यालय ने संस्थागत लाभ हेतु नामांकन दिखाया है,
तो दोनों में से किसी भी दोषी संस्था पर निम्न कार्यवाही का प्रावधान होना अनिवार्य है ।
संभावित विभागीय कार्यवाही
निजी विद्यालय की मान्यता रद्द करना
आर्थिक दंड / शुल्क पुनर्भरण न देना
सरकारी विद्यालय के संस्था प्रधान को 17 CC का नोटिस जारी करना
भविष्य में ऐसे विद्यालयों की आरटीई प्रवेश पात्रता निलंबित करना
“शिक्षा का अधिकार केवल एक अधिकार नहीं,
बल्कि बच्चों के सपनों को साकार करने का एक पवित्र दायित्व है।”
आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता को बनाए रखने हेतु दोहरे नामांकन पर रोक, कठोर जांच एवं विभागीय कार्रवाई न केवल आवश्यक है बल्कि कानून की दृष्टि से भी बिल्कुल न्यायसंगत है।
इससे
फर्जी प्रवेशों पर रोक लगेगी,
विद्यालयों द्वारा मनमानी समाप्त होगी,
और सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित होगा।
“झूठ की ईमारत चाहे ऊंची बन जाए,
पर सच की नींव के आगे टिक नहीं पाती…”
✍️ अकरम खान पाली










