सोजत नगर। सोजत नगर की प्राचीन एवं ऐतिहासिक बागेलाव नाड़ी पर लगातार हो रहे अतिक्रमण को लेकर क्षेत्रवासियों में गहरा रोष व्याप्त है। नागरिकों ने उपखंड प्रशासन, तहसील प्रशासन तथा नगरपालिका ईओ से तुरंत प्रभाव से नाड़ी का पुनः सीमांकन कराने और समस्त अतिक्रमण हटाने की मांग की है।
नगरवासियों ने बताया कि लगभग 500 वर्ष पूर्व निर्मित यह नाड़ी सदियों से जीव–जंतुओं एवं गौवंश के पीने के पानी का प्रमुख स्रोत रही है। किंतु हाल के वर्षों में नाड़ी के तटों पर अतिक्रमणकारियों द्वारा अवैध बाड़े खड़े कर दिए गए हैं। नाड़ी के आसपास थोड़े–थोड़े अंतराल में हो रहा यह अनाधिकृत कब्जा नाड़ी के मूल स्वरूप को नष्ट कर रहा है।
स्थानीय लोगों ने चिंता जताते हुए कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह पुरातन जलस्रोत पूरी तरह समाप्त हो सकता है। क्षेत्र के सामाजिक संगठनों व नागरिक प्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि बागेलाव नाड़ी की पैमाइश कर उसकी मूल सीमा सार्वजनिक की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के अतिक्रमण पर रोक लग सके।
अतिक्रमण हटाने की इस मांग का समर्थन करते हुए अखिल भारतीय गुरु फूलनारायण आश्रम न्यास अध्यक्ष सुरेंद्र त्रिवेदी, वरिष्ठ नागरिक समिति अध्यक्ष सुरेश ओझा, पार्षद जोगेश जोशी, भारत विकास परिषद अध्यक्ष देवीलाल सांखला, महालक्ष्मी ट्रस्ट अध्यक्ष रमेश व्यास, पेंशनर समाज अध्यक्ष लालचंद मोयल, सुरेश ओझा ,प्रफुल्ल ओझा, सुरेंद्र व्यास, अशोक शर्मा, अनिल ओझा, सोजत सेवा मंडल के ताराचंद सैनी, पुष्पतराज मुणोत, अभिनव कला मंच अध्यक्ष गोरधनलाल गहलोत, उपाध्यक्ष श्यामलाल व्यास, सचिव चेतन व्यास, वरिष्ठ नागरिक समिति के हितेंद्र व्यास, जितेंद्र श्रीमाली, धीरेन्द्र, पंडित वीरेन्द्र दवे ,धर्मेंद्र व्यास, राजेंद्र जोशी, अजय जोशी, गोपाल अवस्थी अशोक गहलोत, सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने भी आवाज उठाई है। स्थानीय लोगों ने स्पष्ट कहा कि प्रशासन अगर तत्परता दिखाए तो नाड़ी का अस्तित्व बचाया जा सकता है। नागरिकों ने उम्मीद जताई कि शीघ्र ही नाड़ी से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू होगी।










