सोजत | 24 दिसंबर। सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर इन दिनों यह दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि लौकी का जूस हार्ट अटैक को “रामबाण” तरीके से रोक देता है और धमनियों की ब्लॉकेज ठीक कर देता है। इन संदेशों में प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथ अष्टांग हृदयम् और इसके रचयिता महर्षि वाग्भट का हवाला देकर लौकी (बॉटल गार्ड) को अत्यधिक क्षारीय बताते हुए उपचारात्मक दावे किए जा रहे हैं।
हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि हार्ट अटैक एक जटिल चिकित्सकीय स्थिति है, जिसका संबंध उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, आनुवंशिक कारणों और जीवनशैली से होता है। इसे केवल “रक्त की अम्लता” से जोड़कर देखना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है। आधुनिक चिकित्सा में हृदय की धमनियों में रुकावट (एथेरोस्क्लेरोसिस) को एसिड–क्षार सिद्धांत से नहीं, बल्कि वसा जमाव, सूजन और प्लाक निर्माण से समझा जाता है।
विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि लौकी एक पौष्टिक सब्जी है, जिसमें पानी और फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो संतुलित आहार का हिस्सा बन सकती है। लेकिन यह कहना कि लौकी का जूस 2–3 महीनों में सभी हार्ट ब्लॉकेज “ठीक” कर देगा या ऑपरेशन की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी—ऐसा दावा भ्रामक और जोखिमपूर्ण है। बिना चिकित्सकीय परामर्श के ऐसे उपाय अपनाने से समय पर इलाज में देरी हो सकती है, जो जानलेवा भी हो सकती है।
आयुर्वेदिक ग्रंथों का महत्व अपनी जगह है, परंतु किसी भी प्राचीन संदर्भ की आधुनिक व्याख्या करते समय प्रमाण-आधारित चिकित्सा (Evidence-based Medicine) को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। डॉक्टरों की सलाह है कि हृदय संबंधी लक्षण—जैसे सीने में दर्द, सांस फूलना, अत्यधिक पसीना—दिखें तो तुरंत अस्पताल जाकर जांच कराएं। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, दवाइयों का पालन और चिकित्सकीय निगरानी ही हृदय स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित मार्ग है।
निष्कर्ष: लौकी जैसे खाद्य पदार्थ स्वस्थ आहार का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन हार्ट अटैक की रोकथाम या इलाज के लिए इन्हें “रामबाण” बताकर प्रचारित करना उचित नहीं। किसी भी उपचार या सप्लीमेंट को अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श आवश्यक है।










