पाली। पाली निवासी खुशबू राजपुरोहित (22) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद पीहर पक्ष ने दहेज प्रताड़ना और जहर देने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि खुशबू को दहेज में कार नहीं लाने तथा बांझ होने के ताने देकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। चार दिनों तक जोधपुर के मथुरा दास माथुर अस्पताल में जिंदगी और मौत से जंग लड़ने के बाद शुक्रवार सुबह खुशबू ने दम तोड़ दिया।
“बेटियाँ मरती नहीं, रोज़-रोज़ मारी जाती हैं…
कभी दहेज, कभी तानों में उतारी जाती हैं…”
पीहर पक्ष की पीड़ा और आरोप:-
मृतका के भाई इंद्रजीत राजपुरोहित ने बताया कि मई 2022 में खुशबू की शादी पिलोवनी गांव निवासी हर्षित सिंह से हुई थी, जिसका व्यवसाय जयपुर में बताया गया है।
पिता अमर सिंह राजपुरोहित पाली में इलेक्ट्रिक दुकान संचालित करते हैं ।
भाई का आरोप है कि शादी के कुछ महीनों बाद ही सास और जेठानी ने दहेज कम लाने का ताना देना शुरू कर दिया। खुशबू को बांझ कहकर मानसिक रूप से तोड़ा गया। पति हर्षित ने भी खुशबू की व्यथा को अनसुना कर दिया। दहेज में कार नहीं देने पर विवाद बढ़ता गया।
जुलाई 2025 से खुशबू राजपुरोहित अपने पीहर पाली में रह रही थी। पीहर पक्ष के अनुसार 16 अक्टूबर को ससुराल वाले परिवारजनों एवं समाजजनों की बैठक के बाद यह आश्वासन देकर खुशबू को वापस ले गए कि अब कोई परेशानी नहीं होगी । परिजन आरोप लगाते हैं कि 21 अक्टूबर दोपहर 12:30 बजे अचानक फोन कर कहा गया कि खुशबू ने कुछ “खा लिया” है, जबकि सच छिपाने के लिए समय पर अस्पताल ले जाने में भी देरी की गई।
“कैसे कहूँ कि घर नहीं, वो जल्लादों का अड्डा था…
जहाँ बेटी दहेज नहीं, तोहमतों में लिपटा धड़ा था…”
अस्पताल में चलती रही जंग, इंसाफ़ की उम्मीद में बंद रहा शवगृह
परिजनों के अनुसार जब वे अस्पताल पहुँचे, खुशबू वेंटिलेटर पर थी और बयान देने की हालत में नहीं थी। शुक्रवार सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद गुस्साए पीहर पक्ष ने आरोपियों की गिरफ्तारी तक शव नहीं उठाने का निर्णय लिया । पाली पूर्व विधायक प्रत्याक्षी , महावीर सिंह सुकरलाई भी जोधपुर धरना स्थल पर पहुंचें
समाज के लिए प्रश्न और व्यवस्था के लिए चेतावनी-
यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है —
आखिर कब तक दहेज और तानों की आग में बेटियाँ झुलसती रहेंगी ❓
कब तक “बांझ”, “कम दहेज”, “इज़्ज़त” और “समाज क्या कहेगा” जैसी मानसिकताएँ किसी खुशबू की जान लेती रहेंगी ❓
“अब वक़्त है चुप न रहने का, आवाज़ उठे जमकर…
वरना हर घर में ‘खुशबू’ सा चिराग बुझाया जाएगा…”
समाज के नाम सख़्त संदेश:-
दहेज माँगना अपराध है और अपराधी को बचाना उससे बड़ा अपराध। ताने किसी को मारते नहीं दिखते पर ख़त्म ज़रूर कर देते हैं।
बेटियाँ संपत्ति नहीं, संवेदनाओं का अस्तित्व हैं , सम्मान उनका अधिकार है।
खुशबू की मौत एक परिवार का शोक नहीं, पूरे समाज के लिए आईना है।
आवश्यकता है सख़्त कानून से भी ज्यादा जागरूक और संवेदनशील समाज की—जहाँ दहेज, ताने और प्रताड़ना को परंपरा नहीं, अपराध माना जाए ।










