गुजरात /सौराष्ठ / राजस्थान।

⬆️ नागेश्वर ज्योतिर्लिंग
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अभिनव कला मंच सोजत के सचिव चेतन व्यास द्वारा धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के अंतर्गत गुजरात स्थित नागेश वन, नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, गोपी तालाब, बेट द्वारका एवं स्वर्ण द्वारका मंदिर के बारे में प्राचीन ऐतिहासिक जानकारियों का संग्रहण किया गया।

⬆️नागेश वन द्वारका
चेतन व्यास ने बताया कि नागेश वन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अनुशंसा पर प्राचीन भारतीय वैदिक परंपरा एवं आधुनिक तकनीक के समन्वय से विकसित किया गया है। नागेश वन से आगे स्थित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का अत्यंत प्राचीन धार्मिक महत्व है।

⬆️नागेश वन द्वारका
किंवदंती के अनुसार, दारुका नामक राक्षसी को दारूक वन में प्रवेश की अनुमति नहीं थी, परंतु उसने माता पार्वती को प्रसन्न कर वहां प्रवेश किया। इसके बाद उसने उत्पात मचाया। उसी समय सुप्रिया नामक शिवभक्त साध्वी ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव से रक्षा की प्रार्थना की। साध्वी की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान महादेव ने यहां ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट होकर राक्षसी का वध किया। इसी कारण यह स्थल नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रसिद्ध हुआ। यहां श्रद्धालु नाग-नागिन का जोड़ा चढ़ाकर मनोकामना पूर्ति की कामना करते हैं।

⬆️नागेश्वर ज्योतिर्लिंग द्वारका
इसी क्रम में चेतन व्यास ने गोपी तालाब का भी भ्रमण किया। बताया जाता है कि यह स्थल लगभग 5000 वर्ष प्राचीन है और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का प्रतीक स्थल माना जाता है। कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन का घमंड दूर करने के लिए काबा भील लुटेरों को भेजा, जिन्होंने अर्जुन को परास्त किया। अर्जुन के साथ गई गोपियों ने इस तालाब में कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त की, और तब से यह स्थान गोपी तालाब कहलाया। यहां की मिट्टी को गोपीचंदन कहा जाता है, जो आज भी अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इसी स्थल पर राधा-कृष्ण मंदिर भी स्थित है।
धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की इस यात्रा में चेतन व्यास द्वारा एकत्रित की गई जानकारी भारतीय संस्कृति की गहराई और ऐतिहासिक वैभव को उजागर करती है। अभिनव कला मंच के माध्यम से चेतन व्यास ने प्रस्तुत की धर्म, इतिहास और संस्कृति का अनूठा संगम!
✍️ संवाददाता- अजय कुमार जोशी सोजत सिटी।










