21-22 दिसंबर साल का सबसे छोटा दिन होता है। इसे विंटर सोलस्टाइस (शीतकालीन अयनांत) भी कहा जाता है। विंटर सोलस्टाइस के दिन उत्तरी गोलार्द्ध में सबसे बड़ी रात भी आज ही होती है। यह वही तारीख होती है, जब हमारी धरती सूरज से सबसे दूर होती है। सोलस्टाइस लैटिन शब्द सोल्सटाइन से बना है जिसका मतलब होता है ‘सूरज स्थिर है’।
इस दिन सूर्य कैप्रिकॉर्न सर्किल में पहुंचता है। यह एक दिन में नहीं होता है। 25 दिसंबर के बाद दिन बड़े होने लगते हैं। इससे पहले तक दिन छोटे और रातें बड़ी होती हैं। ऐसा कहते हैं कि इस तारीख को चंद्रमा की किरणें धरती पर ज्यादा देर तक और सूरज की किरणें समय से पहले चली जाती हैं।
<<जानिए क्या है शीत अयनांत>>
आमतौर हम सभी को हर दिन एक जैसा लगता है। सर्दी में दिन छोटा और रात लंबी होती और गर्मी में दिन लंबा और रात छोटी होती है। लेकिन क्या आपको पता है कि बाकी दिनों के अलावा दिसंबर महीने में एक दिन ऐसा होता है, जब दिन छोटा और रात सबसे लंबी होती है। चलिए जानते हैं आखिर क्यों है ऐसा...
भारत में सर्दियों के मौसम में दिन छोटा और रात लंबी होती है, यह बात हम सभी को पता है। लेकिन साल के आखिरी महीने यानी दिसंबर में एक दिन ऐसा होता है जब साल का सबसे छोटा दिन और बड़ी रात होती है। कुछ लोग इस बात से अनजान होते हैं कि ठंड के दिनों में तो वैसे भी दिन छोटा और रात बड़ी होती है। लेकिन यह आम दिनों की अपेक्षा अलग है। भूगोल की भाषा में इसे शीत अयनांत कहते हैं, जिसकी वजह से यह घटना घटित होती है।
<<कैसे बदलता है मौसम?>>
आमतौर पर चार प्रकार के मौसम होते हैं : गर्मी सर्दी, बसंत और पतझड़। अब सोचने की बात यह है कि आखिर पृथ्वी पर मौसम कैसे बदलते हैं, तो बता दें हमारी पृथ्वी अपने अक्ष पर लंबवत् से 23.5 डिग्री के कोण पर झुकी हुई है। इस झुकाव और सूर्य के चारों ओर परिक्रमा की वजह से मौसम में बदलाव होते हैं। साथ ही हर जगह पर दिन की अवधि में भी भिन्नता होती है।
सूर्य की परिक्रमा के चलते जब धरती का उत्तरी गोलार्द्ध छह महीने तक सूरज की ओर झुका होता है, तो इस पर सूर्य की किरणें सीधे पड़ती है। उस दौरान उत्तरी गोलार्द्ध पर स्थित देश में गर्मी और दिन की अवधि लंबी होती है। इसके अलावा जब दक्षिणी गोलार्द्ध पर सूर्य की तिरछी किरणें पड़ती है तो सर्दी का मौसम होता है और दिन छोटा होता है।
>> क्यों होता है सबसे छोटा दिन <<
वैज्ञानिकों के मुताबिक धरती अपने एक्सिस पर साढ़े तेईस डिग्री झुकी है। इस दिन धरती के उत्तरी गोलार्ध से सूरज की दूरी ज्यादा हो जाती है। हिंदी परंपरा में कहते हैं कि इस दिन से सूर्य का दक्षिणायन से उत्तरायण दिशा में प्रवेश करता है।
प्रत्येक वर्ष 21 या 22 दिसंबर के दिन सूर्य की किरणें दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित मकर रेखा पर डायरेक्ट पड़ती हैं, जिसके चलते उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य से सबसे दूर होता है। इस कारण से उत्तरी गोलार्द्ध में सबसे छोटा दिन होता है। दिन की अवधि का समय 10 घंटे 19 मिनट के करीब होता है। अब ऐसे में देखा जाए तो दिन सबसे छोटा और रात लंबी होती है।










