सोजत रोड/ सियाट। वी सोच महाविद्यालय सियाट में 26 नवंबर को संविधान दिवस बड़े उत्साह, गरिमा और राष्ट्रीय चेतना के साथ भव्य रूप से मनाया गया। महाविद्यालय परिसर

में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने भारतीय संविधान के इतिहास, महत्व और उसकी मूल भावना को गहराई से समझा। कार्यक्रम की शुरुआत राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक मोहम्मद आसिफ के उद्बोधन से हुई, जिन्होंने संविधान अंगीकरण 26 नवंबर 1949 के ऐतिहासिक संदर्भों को विस्तार से समझाते हुए बताया कि भारत में प्रथम स्वतंत्रता दिवस वर्ष 1930 में पूर्ण स्वराज दिवस के रूप में मनाया गया था, जिसने भारतीय स्वाधीनता आंदोलन को निर्णायक मोड़ प्रदान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान केवल संचालित करने वाला दस्तावेज नहीं बल्कि “राष्ट्र की आत्मा” है, जो हर नागरिक को अधिकार और कर्तव्य का संतुलन सिखाता है।
कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं को संविधान की शपथ दिलवाई गई। शपथ ग्रहण के क्षणों में सभागार देशभक्ति और लोकतांत्रिक मूल्यों की गूंज से भर उठा। महाविद्यालय के प्रबंध निदेशक हेरम्ब भारद्वाज ने भारतीय संविधान की विशेषताओं, इसके स्वरूप और मौलिक कर्तव्यों पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संविधान विश्व का सबसे व्यापक और सर्वसमावेशी संविधान है, जिसने भारत जैसे विविधतापूर्ण राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोया है।
राष्ट्रीय सेवा योजना के प्रभारी राजेंद्र कुमावत ने कार्यक्रम में राष्ट्रीय विधि दिवस के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि 26 नवंबर न केवल संविधान अंगीकरण का दिन है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और न्यायपालिका की स्वतंत्रता के प्रति गर्व महसूस करने का अवसर भी है। वी सोच महाविद्यालय के अजय जोशी ने वर्ष 2015 से संविधान दिवस मनाए जाने की परंपरा, संविधान प्रारूप समिति में डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदान और प्रस्तावना के आदर्शों को सरल भाषा में विद्यार्थियों के समक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावना भारतीय लोकतंत्र की धड़कन है, जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे मूल मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाती है।
महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. वर्षा तिवारी ने संविधान के महत्व पर अपने प्रेरक विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि राष्ट्र को आगे बढ़ाना है तो युवाओं को संविधान को समझकर उसके सिद्धांतों को जीवन में लागू करना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों को जिम्मेदार नागरिक बनकर देश की अखंडता, शांति और विकास में योगदान देने का आह्वान किया।
संविधान दिवस कार्यक्रम में शाहरुख खान, अशोक गहलोत, कुन्दन सिंह गुर्जर, भावना बौराणा, भावना गौराणा, उगमराज प्रजापत सहित अनेक विद्यार्थी, शिक्षण एवं गैर-शिक्षण स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम ज्ञान, जागरूकता और लोकतांत्रिक मूल्यों का अद्भुत संगम बनकर उभरा, जिसने विद्यार्थियों में संवैधानिक चेतना और राष्ट्रीय जिम्मेदारी की नई उमंग पैदा की। यह आयोजन अपने उद्देश्य में पूर्णत: सफल रहा और महाविद्यालय के इतिहास में एक प्रेरक अध्याय के रूप में दर्ज हुआ।










