*देव प्रबोधिनी एकादशी पर जागे भगवान विष्णु:तुलसी–शालिग्राम विवाह से आरंभ हुए शुभ कार्य-कार्तिक शुक्ल एकादशी पर भक्तिमय उल्लास, मंदिरों में पूजन–आरती और दीपदान से सजी भक्ति की अलौकिक छटा*

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पाली/सोजत :अजय कुमार जोशी। कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली देव प्रबोधिनी एकादशी (देवउठनी एकादशी) का पर्व इस बार विशेष संयोग के साथ मनाया जा रहा है। भगवान विष्णु की योगनिद्रा समाप्त होकर इस दिन वे सृष्टि संचालन का कार्य पुनः संभालते हैं। मान्यता है कि आषाढ़ शुक्ल एकादशी से आरंभ हुआ चातुर्मास इसी दिन समाप्त होता है। इस दिन से विवाह, गृहप्रवेश, यज्ञोपवित जैसे सभी मांगलिक कार्यों की पुनः शुरुआत होती है।

🌿 तुलसी–शालिग्राम विवाह से आरंभ हुआ शुभ काल-
देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी माता का भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप से विवाह कराया जाता है। इस धार्मिक आयोजन को लेकर घर-घर में मंगलगीतों की गूंज रही। मंदिरों में भक्तों ने विशेष साज-सज्जा की, तुलसी मंडप सजाए गए, और दीपमालाओं से वातावरण आभामय बन गया। पंडितों के अनुसार, इस दिन तुलसी–शालिग्राम विवाह का साक्षी बनने वाला भक्त पुण्य और समृद्धि प्राप्त करता है।

📖 पौराणिक कथा में निहित है भक्ति और धर्म का गूढ़ संदेश-
पुराणों के अनुसार, धर्मध्वज की पुत्री वृंदा, जो विष्णु की परम भक्त थी, ने अपने पतिव्रत बल से दैत्यराज जालंधर को अजेय बना दिया था। देवताओं के निवेदन पर भगवान विष्णु ने छलपूर्वक वृंदा के पतिव्रत धर्म को तोड़ा, जिससे जालंधर का वध संभव हुआ। यह जानकर वृंदा ने विष्णु को शाप दिया कि वे पत्थर की शिला बन जाएं। उसी श्राप से शालिग्राम की उत्पत्ति हुई, और वृंदा की भस्म से तुलसी का जन्म हुआ। भगवान विष्णु ने तुलसी को वचन दिया कि उनकी पूजा तुलसी के बिना अधूरी रहेगी।

🪔 व्रत तिथि को लेकर विशेष स्थिति
ज्योतिषाचार्य पं. वीरेन्द्र दवे ने बताया कि — “एकादशी व्रत दो प्रकार से संपन्न होता है। इस बार भी गृहस्थ व्यक्तियों के लिए एकादशी व्रत 1 नवंबर को और वैष्णव संप्रदाय के लिए 2 नवंबर को रहेगा। यह नियम सूर्योदय की तिथि और व्रत-पालना के शास्त्रीय आधार पर निर्धारित होता है। अतः कई बार ऐसी स्थिति बनती है जब एकादशी का पालन दो भिन्न दिनों में किया जाता है।”

भक्ति, आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम-
मंदिरों में शुक्रवार रात से ही भजन–कीर्तन और दीपदान का क्रम आरंभ हो गया। प्रातःकाल आरती के समय भक्तों ने भगवान विष्णु का जागरण कर विशेष पूजन किया। कई स्थानों पर तुलसी–शालिग्राम विवाह समारोह धूमधाम से संपन्न हुए। श्रद्धालु व्रत–पूजन में लीन रहे और “जय श्रीहरि” के जयकारों से वातावरण गुंजायमान रहा।

देव प्रबोधिनी एकादशी से शुभ कार्यों का आरंभ, भक्ति की

ज्योति से जगमगाए मंदिर और आस्था के दीपों से आलोकित हुआ वातावरण।

Ajay Joshi
Author: Ajay Joshi

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