“रावण: अहंकार का प्रतीक, विद्या का उपासक”

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रावण – याद करने योग्य एक व्यक्तित्व

रावण का नाम आते ही सबसे पहले हमारे मन में “अहंकार, अधर्म और अन्याय” की छवि बनती है। लेकिन अगर हम रावण को केवल नकारात्मक दृष्टि से देखें, तो यह अधूरा होगा। असल में रावण एक बहुआयामी व्यक्तित्व था। वह सिर्फ एक राक्षस राजा नहीं था, बल्कि विद्वान, महापंडित, शिवभक्त और शूरवीर भी था। यही कारण है कि आज भी रावण को अलग-अलग दृष्टियों से याद किया जाता है।

1. विद्या और ज्ञान का प्रतीक

रावण को वेदों और शास्त्रों का अद्वितीय ज्ञान था। उसे ज्योतिष, आयुर्वेद, संगीत और राजनीति में गहरी समझ थी। उसकी रचना “शिव तांडव स्तोत्र” आज भी शिवभक्तों द्वारा श्रद्धा से गाया जाता है। विद्या के क्षेत्र में उसका योगदान उसे स्मरणीय बनाता है।

2. शिवभक्त रावण

रावण महादेव का अनन्य भक्त था। उसने कैलाश पर्वत को उठाने तक का प्रयास किया। उसके भक्ति गीत आज भी कई शिवालयों में गूंजते हैं। यह उसकी भक्ति और आस्था का प्रमाण है।

3. पराक्रम और शौर्य

रावण एक महान योद्धा और अपराजेय सेनापति था। देवता, दानव और असुर – सभी उसकी शक्ति से भयभीत रहते थे। उसके युद्ध कौशल और संगठन क्षमता से आज भी नेतृत्व के गुण सीखे जा सकते हैं।

4. अहंकार का प्रतीक

रावण की सबसे बड़ी कमजोरी उसका अहंकार था। सीता हरण और राम के विरोध ने उसे विनाश की ओर धकेल दिया। यही कारण है कि हर वर्ष दशहरे पर रावण का दहन कर हमें यह शिक्षा दी जाती है कि “कितना भी ज्ञानी और शक्तिशाली इंसान क्यों न हो, यदि उसमें अहंकार आ जाए तो उसका पतन निश्चित है।”

5. याद करने का कारण

रावण को आज भी इसलिए याद किया जाता है क्योंकि वह सिर्फ खलनायक नहीं, बल्कि एक जटिल व्यक्तित्व था।

  • विद्या से प्रेम → प्रेरणा देता है।

  • भक्ति और श्रद्धा → आस्था को जगाती है।

  • शक्ति और साहस → नेतृत्व सिखाते हैं।

  • अहंकार और अन्याय → हमें सजग करते हैं।


निष्कर्ष

रावण एक ऐसा पात्र है जिसे सिर्फ नकारात्मक रूप में नहीं देखा जा सकता। वह ज्ञान और शक्ति का भंडार था, लेकिन उसका पतन अहंकार से हुआ। इसलिए हम आज भी रावण को याद करते हैं – एक चेतावनी, एक प्रेरणा और एक शिक्षा के रूप में।

Vartmaan Times
Author: Vartmaan Times

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