*इंद्रियों को अंतर्मुखी करने से आत्मस्वरूप का दर्शन होता है… स्वामी निर्मलस्वरूप, वरिष्ठजनों ने धर्मयात्रा में स्वामी निर्मलस्वरूप महाराज के दर्शन वंदन कर आशीर्वाद पाया*

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सोजतरोड । वरिष्ठ नागरिक समिति के वानप्रस्थियों ने अपनी धर्मयात्रा के दूसरे दिन नगर के सिसरवादा क्षेत्र में केसरिया कंवरजी मंदिर में चातुर्मास प्रवासी ब्रह्मनिष्ठ स्वामी निर्मलस्वरूप महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद लिया । स्वामीजी ने साधन प्रवचन माला में बताया कि  मैं कौन हूं यह जानना ही जीव का लक्ष्य है, बहिर्मुखी इंद्रियों को अंतर्मुखी करने से ही आत्मस्वरूप का भान होता है । मन व इंद्रियों के साथ जीव जन्म जन्मांतर संसार में भ्रमण करता है । अत: जीव कर्म में तीन “द”
की प्रधानता रखे दया,इंद्रीय दमन व दान।  वरिष्ठजनों ने  डाॅ. वासुदेव सांखला डॉ. हुकमीचंद रामनानी ओमप्रकाश जोशी लक्ष्मीकांत भाटी रतनलाल प्रजापत इंद्रा प्रजापत अशोक जांगला शकुन्तला शर्मा ओमप्रकाश अग्रवाल प्रीतम कुमार मित्तल वीरमराम चौधरी सुरेश पोरवाल गिरधारीलाल गोयल शिवरतन जोशी रतनलाल मेवाड़ा हेमाराम सोलंकी संग स्वामी को पुष्पहार व साफा बंधन कर चरण वंदना की । हरि गुणगान के साथ महाआरती में सहभागी बने ।

Ajay Joshi
Author: Ajay Joshi

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