सोजत:25 मार्च 2025, मंगलवार
✍️ न्यूज़ रिपोर्टर-अजय कुमार जोशी

औरंगजेब विवाद में अब जोधपुर के वीर योद्धा दुर्गादास राठौड़ का जिक्र भी शामिल हो गया है दर असल औरंगजेब विवाद में सपा नेता अबू आजमी एवं अनुराग भदौरिया तथा लेफ्ट के विवेक श्रीवास्तव द्वारा लगातार हिंदु राजाओं को लेकर दुष्प्रचार पर पलटवार करतें हुए इतिहासकारों एवं मारवाड़ के प्रबुद्ध जनों ने तथ्यात्मक जानकारी देते हुए बताया कि मारवाड़ के वीर योद्धा दुर्गादास राठौड़ ने जब औरंगजेब के बेटे मुहम्मद अकबर को अपने साथ मिलाया तब औरंगजेब के पोते पोती भी दुर्गादास के संरक्षण में थे दुर्गादास ने मुहम्मद अकबर को सुरक्षित दक्षिण में शंभाजी महाराज तक पहुचाया था दुर्गादास ने अपनी ज्यादा तर रणनीति जोधपुर एवं सोजत तथा नागौर के दुर्ग में रहकर बनाई थी। 1704 में मुहम्मद अकबर की मृत्यु के बाद औरंगजेब अपने पोते पोतियों को पाने के लिए तड़प उठा उसने दुर्गादास से अनुनय विनय की तब दुर्गादास ने भारतीय संस्कृति के अनुरूप सम्मान पूर्वक औरंगजेब के पोते पोतियों को औरंगजेब के कैंप तक पहुचाया तब औरंगजेब ने अपने पोते पोतियों को कहा तुम विधर्मियों के यहां रहकर आए हो इसलिए रोज कुरान पढ़ो तब औरंगजेब की पोती ने कहा हम तो मारवाड़ में भी रोज कुरान की आयतें पढ़ा करतें थे तब औरंगजेब का मुंह खुला का खुला रह गया उसने दुर्गादास राठौड़ को साक्षात देवदूत माना दर असल वीर दुर्गादास राठौड़ ने एक मुस्लिम महिला को औरंगजेब के पोते पोतियों को कुरान पढ़ाने एवं शिक्षा देने के लिए नियुक्त कर रखा था भारत सरकार ने वर्ष 1988 व 2003 में दुर्गादास के समान में डाक टिकट एवं सिक्के जारी किए थे दुर्गादास का जन्म 13 अगस्त 1638 को मारवाड़ के सालवा गांव में हुआ था 88 से भी ज्यादा वर्षों तक जीवित रहे उन्होंने अपनी अंतिम सांस 22 नवम्बर 1718 को उज्जैन की क्षिप्रा नदी के तट पर ली वे युद्ध के दौरान घोडे पर ही नींद ले लेते थे तथा खाना भी खा लेते थे।










