रेंदड़ी में 3.20 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का हुआ लोकार्पण
पेड़-पौधे जीवन का आधार हैं – विधायक चौहान

सोजत। निकटवर्ती रेंदड़ी ग्राम पंचायत में 3 करोड़ 20 लाख रुपए की लागत से पूर्ण हुए विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण समारोह बुधवार को आयोजित हुआ। समारोह की मुख्य अतिथि विधायक श्रीमती शोभा चौहान रहीं। उन्होंने विकास कार्यों के लोकार्पण के बाद अपने उद्बोधन में कहा कि ग्राम पंचायत रेंदड़ी के चहुंमुखी विकास में सरपंच संतोष कंवर लखावत के योगदान को सदा याद किया जाएगा। जिनके कार्यकाल में सर्वाधिक राशि सवा 3 करोड़ रुपये के विकास कार्य हुए जो ऐतिहासिक है। उन्होंने ग्रामीणों से अधिकाधिक पेड़ लगाने तथा पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। श्रीमती चौहान ने कहा कि पेड़-पौधे जीवन का आधार हैं और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पौधारोपण कर उनकी देखभाल का संकल्प लेना चाहिए।

सरपंच श्रीमती संतोष कंवर लखावत ने बताया कि विकास कार्यों के पूर्ण होने से ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी तथा गांव के विकास को गति मिलेगी। समाजसेवी अखेसिंह लखावत ने बताया कि कार्यक्रम से पूर्व विधायक श्रीमती चौहान ने नवनिर्मित पानी की टंकी व पाइपलाइन, उप स्वास्थ्य केंद्र, सीसी सड़क, नाली निर्माण, बासनी मुथा में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में पुस्तकालय भवन, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय बासनी तिलवाड़िया में प्रार्थना स्थल पर डोम सेट तथा बासनी मुथा में सार्वजनिक श्मशान घाट की चारदीवारी निर्माण सहित विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण किया।
कार्यक्रम में विकास अधिकारी सुरेश कविया, अतिरिक्त विकास अधिकारी महिपाल सिंह लखावत, उप सरपंच सूजाराम चौधरी, भाजपा नेता मोहन जाट, वार्डपंच शैतान सिंह लखावत, श्रीमती उम्मेद कंवर लखावत, बाबूलाल आगलेचा, रतनाराम बावरी, भंवरलाल सैनी आदि अतिथि उपस्थित रहे। सभी आगंतुक अतिथियों का पंचायत परिवार द्वारा बहुमान किया गया। लोकार्पण समारोह को लेकर ग्रामीणों में उत्साह रहा।
सोजत के 90 वर्षीय वरिष्ठ पर्यावरणविद् जयंतीलाल त्रिवेदी ने बासनी तिलवाड़िया के विद्यालय में डोम निर्माण होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए विधायक श्रीमती शोभा चौहान का आभार ज्ञापित किया। त्रिवेदी ने बताया कि वे 1943-44 में इसी गाँव के पैतृक रावले में रहते थे। तब गाँव में स्कूल नहीं हुआ करता था, पढ़ने के लिए हम दो भाई पैदल सोजत आते थे।









