सोजत। सोजत क्षेत्र के कई विद्यालयों में जर्जर कक्षा कक्षों को तो गिरा दिया गया, लेकिन अब उनके पुनर्निर्माण के लिए न तो बजट जारी हुआ है और न ही कोई ठोस कार्यवाही आगे बढ़ी है। स्थिति यह है कि विद्यालय प्रबंधन समितियां (एसएमसी), अभिभावक और शिक्षक पुनर्निर्माण के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। शिक्षा विभाग का कहना है कि भामाशाहों को प्रेरित कर कमरों का निर्माण करवाया जाए, वहीं अभिभावकों का स्पष्ट कहना है कि वे अपने बच्चों को दूर-दराज के अन्य विद्यालयों में पढ़ने भेजने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में विद्यार्थियों और शिक्षकों की स्थिति त्रिशंकु जैसी बनती जा रही है।
उल्लेखनीय है कि जर्जर विद्यालय भवनों के सर्वे के क्रम में पाली जिले में माननीय न्यायाधीश के निर्देशन में सार्वजनिक निर्माण विभाग एवं शिक्षा विभाग द्वारा सोजत क्षेत्र में भी निरीक्षण किया गया था। इस दौरान राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय नेहड़ा बेरा एवं राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय नम्बर 2 सहित अन्य विद्यालयों को चिन्हित कर नव निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार किए गए थे
तीन माह बाद भी नहीं हुआ बजट आवंटन-
माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के बाद 27 सितंबर 2025 को एक प्रतिनिधिमंडल ने सोजत क्षेत्र के तीन विद्यालयों—राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय नेहड़ा बेरा, नैनावतो का बेरा (चौकी दारों की ढाणी) तथा राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय नम्बर 2—का अवलोकन कर रिपोर्ट आगे भेजी थी। वहीं जयपुर से आई शिक्षा परिषद अधिकारी ओम प्रभा ने भी क्षतिग्रस्त विद्यालयों का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रेषित की थी, लेकिन तीन माह बीत जाने के बावजूद बजट आवंटन नहीं हुआ
आखिर कब जारी होगी राशि-
माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद राजस्थान प्राथमिक शिक्षा परिषद (समग्र शिक्षा विभाग, जयपुर) की ओर से आज दिन तक न तो नवीन निर्माण और न ही मरम्मत के लिए वित्तीय राशि जारी की गई है। शिक्षा विभाग के मानकों के अनुसार डीआईएसई (DISE) में विद्यालय की समस्त सूचनाएं दर्ज की जाती हैं। यदि मार्च माह में बजट जारी होता है, तभी मरम्मत एवं निर्माण कार्य संभव हो पाएगा। वहीं राजस्थान विधानसभा सत्र शीघ्र आहूत होने वाला है, ऐसे में विधायकों की अनुशंसा पर भी नव निर्माण एवं मरम्मत के लिए राशि आवंटन की संभावना जताई जा रही है।
इनका कहना-
हितेंद्र व्यास (वरिष्ठ नागरिक): सोजत में कई विद्यालय भवन क्षतिग्रस्त हैं। शिक्षा के मंदिरों की मरम्मत एवं नवीन कक्ष निर्माण के लिए राज्य सरकार को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए।
सत्यनारायण गोयल: त्वरित कार्रवाई के अभाव में समस्या और गंभीर हो गई है। राज्य सरकार को बार-बार अधिकारियों को भेजकर अवलोकन कराने के बजाय न्यायालय के निर्देशानुसार तत्काल राशि जारी कर धरातल पर कार्य शुरू कराना चाहिए।










