*प्री-प्राइमरी RTE पुनर्भरण : अब स्कूलों के धैर्य की नहीं, न्याय की बारी है*

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राजस्थान शिक्षा परिषद जयपुर द्वारा दिनांक 01/12/2025 को एकलव्य भवन, शिक्षा संकुल जयपुर में RTE प्रवेश दिशानिर्देश 2026-27 पर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में गैर-सरकारी विद्यालयों को भी आमंत्रित किया गया है। यह स्वयं प्रमाण है कि निजी विद्यालय शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा हैं और RTE के सुचारू संचालन में सबसे बड़ी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है।

लेकिन वास्तविकता यह है कि अधिकांश निजी विद्यालय प्री-प्राइमरी (PP3+, PP4+, PP5+) में RTE प्रवेश नहीं करते, और जो विद्यालय देते हैं । वे तीन वर्षों तक बिना किसी सरकारी पुनर्भरण के आर्थिक नुकसान झेलते हुए बच्चों को पढ़ाने को मजबूर हैं।

“धैर्य की एक सीमा होती है, और अन्याय की एक प्रतिक्रिया…”

“हमने अपने फ़र्ज़ निभाए बिना शोर किये,
हर साल नन्हें सपनों को संवारते रहे।
अब हक़ की बात करेंगे खुले मंचों पर,
क्योंकि चुप रह कर भी हम बहुत बार हारते रहे।”

सरकार PP3+, PP4+, PP5+ का पुनर्भरण नहीं देती – यह व्यवस्था एकतरफ़ा बोझ बन चुकी है जब RTE अधिनियम 2009 एवं राज्य नियम 2011 में प्री-प्राइमरी शिक्षा को भी मौलिक अधिकार घोषित किया गया,
तब यह भी अपेक्षित था कि जिम्मेदारियाँ और अधिकार समान रूप से बांटे जाएँ।

परंतु आज स्थिति यह है कि:
PP3+ में प्रवेश लेने वाले बच्चों का पूरा ख़र्च निजी विद्यालय उठाते हैं।
तीन वर्ष तक शिक्षकों का वेतन, भवन, सामग्री, संसाधन सब कुछ स्कूल को स्वयं वहन करना पड़ता है।

जबकि RTE के मूल उद्देश्य को पूरा करने में सबसे अधिक योगदान यही विद्यालय दे रहे हैं।

जो पेड़ छाँव देता है, उसे ही धूप में क्यों रखा जाता है?”

“हमने नन्हें हाथों में किताबें दीं, मुस्कानें दीं, उजाले दिये;
पर बदले में हमें सिर्फ़ इंतज़ार और सवाल दिये।
अब वक्त है कि मेहनत का मोल समझे ज़िम्मेदार,
वरना कैसे कहें कि शिक्षा में सबको समान हिस्से दिये।”

क्या सरकार के संज्ञान में लाया गया है कि गैर सरकारी अधिकांश विद्यालय PP3+ प्रवेश क्यों नहीं दे रहे❓

क्योंकि तीन साल तक लगातार नुकसान किसी भी संस्था के लिए टिकाऊ मॉडल नहीं है।
आज आवश्यक है कि बैठक में सिर्फ दिशानिर्देशों पर चर्चा न हो, बल्कि

प्री-प्राइमरी RTE प्रवेश पर स्पष्ट नीति बने।

पुनर्भरण केवल कक्षा 1 से नहीं, PP3+ से शुरू किया जाए।

जो विद्यालय प्री-प्राइमरी में RTE सीटें दे रहे हैं, उन्हें विशेष प्राथमिकता व आर्थिक संरक्षण दिया जाए।

“बिना हक़ मिले सिर्फ़ फ़र्ज़ निभाना, अब सम्भव नहीं…”

सच की लड़ाई है तो आवाज़ बुलंद करनी होगी,
ख़ामोशी से अब हालत नहीं सुधरने वाली।
हक़ मिले तो सेवा सौ गुना कर देंगे,
पर अन्याय हो तो कलम भी तलवार बन जाने वाली।”

क्या निजी विद्यालय तीन वर्षों का बोझ अकेले उठाएँ❓

अगर उत्तर ‘हाँ’ है, तो यह RTE का नहीं, शिक्षा असमानता का मॉडल बन जाएगा।

क्या PP3+–PP5+ को शिक्षा का अधिकार नहीं❓

अगर है तो पुनर्भरण भी अधिकार हो।

क्या भविष्य में कोई विद्यालय PP3+ RTE प्रवेश बिना पुनर्भरण के करने के लिए तैयार रहेगा❓

अगर पुनर्भरण नहीं मिलेगा, तो जवाब स्पष्ट “नहीं” है, और इससे सर्वाधिक नुकसान समाज के सबसे कमजोर बच्चों का होगा।

“जिस व्यवस्था में त्याग एकतरफ़ा हो, वहाँ सुधार दोतरफ़ा होना चाहिए।”

“हम पूरे मन से बच्चों का भविष्य सँवार रहे हैं,
ज़िम्मेदारियों का बोझ अकेले उठा रहे हैं।
अगर शिक्षा सच में सबकी है—
तो उसके खर्च का बोझ भी सब मिलकर उठाएँ ये कह रहे हैं।”

यह बैठक केवल नियम बनाने का मौका नहीं है,
बल्कि
निजी विद्यालयों के न्याय, अधिकार और आर्थिक अस्तित्व की लड़ाई उठाने का अवसर है।

प्री-प्राइमरी RTE पुनर्भरण की मांग कोई संघर्ष नहीं,
कोई विरोध नहीं,
बल्कि शिक्षा व्यवस्था को संतुलित, टिकाऊ और न्यायपूर्ण बनाने की अनिवार्य आवश्यकता है।

✍️अकरम खान पाली।

Ajay Joshi
Author: Ajay Joshi

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