सोजत। सोजत सिटी के मेला चौक स्थित संत लिखमीदास जी महाराज की प्रतिमा के पास भारी मात्रा में गंदा कचरा डाल दिए जाने से नगरवासियों में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है। मेला चौक वह स्थान है जहाँ जन-जन के आराध्य संत लिखमीदास जी महाराज का पावन स्थल स्थित है। बड़ी संख्या में संत के अनुयायी प्रतिदिन यहां दर्शनार्थ आते हैं, किंतु पालिका प्रशासन द्वारा इस धार्मिक स्थल को मानो कचरा पात्र बना दिया गया हो, ऐसा दृश्य क्षेत्रवासियों को व्यथित कर रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पालिका की लापरवाही के चलते यहां कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से गंदगी एवं केमिकलयुक्त कचरा डाला गया है। इससे न केवल धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं, बल्कि आसपास का वातावरण भी गंभीर रूप से प्रदूषित हो रहा है।
36 कौम ने की त्वरित कार्रवाई की मांग- विभिन्न समाजों—विशेषकर 36 कौम—ने संयुक्त रूप से पालिका प्रशासन से मांग की है कि संत स्थल एवं निकटवर्ती पार्क को तुरंत कचरे से मुक्त कर स्वच्छ किया जाए तथा भविष्य में इस क्षेत्र में कचरा डालने पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया जाए। माली समाज पंच गोर्धन गहलोत ने बताया कि माली समाज अध्यक्ष चम्पालाल, पंच लुंबाराम, ताराचंद सैनी सहित गणमान्य लोगों ने संत स्थल पर कचरा डालकर उसे प्रदूषित करने पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के स्थलों को इस प्रकार अपवित्र करना न सिर्फ असंवेदनशीलता है, बल्कि सर्व समाज की भावनाओं पर आघात है।
धार्मिक व सामाजिक स्थलों पर भी बढ़ रहा खतरा- संत स्थल के समीप ही ज्योतिबा फूले पार्क, संन्यास आश्रम, कई मंदिर, संस्कृत विद्यालय, होम्योपैथिक क्लिनिक तथा आगे केजीबी विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इस गंदगी से इन सभी स्थानों का वातावरण दूषित हो रहा है।
महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष श्रीमती ऐश्वर्या सांखला ने भी इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि केमिकलयुक्त कचरा एवं प्रतिबंधित पॉलीथीन के कारण हवा और पानी दोनों जहरीले होते जा रहे हैं। विशेष रूप से बागेलाव नाड़ी, जहाँ सैकड़ों जीव-जंतु अपनी प्यास बुझाने आते हैं, वहां का पानी अब प्रदूषित होकर उनके जीवन के लिए खतरा बन चुका है।
श्रद्धालुओं के लिए भी मुश्किलें बढ़ीं- स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षेत्र में बढ़ती गंदगी से दुर्गंध फैल रही है और श्रद्धालुओं का यहां से गुजरना भी दूभर हो गया है।
नगरवासियों व समाज प्रतिनिधियों ने एक स्वर में मांग की है कि पालिका प्रशासन तुरंत संज्ञान लेकर ,कचरा हटाए, स्थल की सफाई कराए, और भविष्य में इस पावन स्थल को प्रदूषण से बचाने हेतु ठोस व्यवस्था सुनिश्चित करे। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय पर उचित कार्यवाही नहीं की गई तो आंदोलन की राह भी अपनाई जा सकती है।










