सोजत/पाली:अजय कुमार जोशी। अधिष्ठात्री देवी माँ सैजल माता की असीम कृपा और सोजत महोत्सव समिति के अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप 972वें सोजत महोत्सव 2025 का भव्य समापन सिटी टैंक रामेलाव तालाब परिसर में हुआ। संपूर्ण परिसर संगीतमय सुंदरकांड की चौपाइयों और भक्ति संगीत से गूंज उठा, जिससे वातावरण पूर्णतः धार्मिक और आध्यात्मिक हो गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सोजत महोत्सव संयोजक अनोपसिंह लखावत द्वारा पूजा-अर्चना के साथ किया गया, तत्पश्चात स्थानीय गायक पंडित पीयूष त्रिवेदी ने अपने मधुर स्वर में “श्रीराम स्तोत्र” से संगीतमय सुंदरकांड पाठ की शुरुआत की। इस अवसर पर सोजत महोत्सव समिति के सचिव चेतन व्यास ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष का सोजत महोत्सव 22 सितम्बर 2025 को माँ सैजल माताजी मंदिर में महाआरती से आरंभ हुआ था।
महोत्सव के अंतर्गत आयोजित धार्मिक, सांस्कृतिक एवं खेलकूद प्रतियोगिताओं में शहर और आसपास के क्षेत्रों से उमंग-उत्साह से भरे 500 से अधिक छात्र-छात्राओं एवं महिलाओं ने भाग लिया। इनमें कबड्डी, ज्ञानवर्धक प्रतियोगिता, मेहंदी, भाषण, राजस्थानी समूह नृत्य, घूमर नृत्य, बॉलीबॉल प्रतियोगिता तथा “मैं सोजत हूँ” प्रश्नोत्तरी जैसी विविध प्रतियोगिताएँ शामिल रहीं।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सोजत महोत्सव समिति के सदस्य सुरेश ओझा, लालचंद मोयल, मदनलाल चौहान, सत्यनारायण गोयल, मोहनलाल चौधरी, प्रभुरांगी, रशीद गौरी, सत्तूसिंह भाटी, अशोक सैन, महेंद्र माथुर, हितेंद्र व्यास, ओमप्रकाश मोयल, गोरधनलाल गहलोत, देवीलाल सांखला, रामस्वरूप भटनागर, श्यामलाल व्यास, श्यामसिंह चौहान, राजकुमार चौधरी, ऋतुराज सिंह, जोगेश जोशी, ताराचंद सैनी, पुष्पतराज मुणोत, चंपालाल खोरवाल, भवानीशंकर सोनी, नवीन गुप्ता, धीरज गुप्ता, राजेश अग्रवाल, मोहम्मद रफीक, चुन्नीलाल बोस, प्रकाश सोनी, कृष्णा भाटी, विकास गहलोत, नरपत सिंह दैय्या, अजय जोशी, भीकाराम प्रजापत, दुर्गाराम प्रजापत, पुनाराम प्रजापत एवं माणक चौहान सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
इस मौके पर सोजत महोत्सव संयोजक अनोपसिंह लखावत एवं सभी कार्यकर्ताओं का साफा, दुपट्टा, माला एवं तलवार भेंट कर बहुमान किया गया।
कार्यक्रम का समापन हनुमान चालीसा पाठ और माँ सैजल माता की आरती के साथ हुआ। तत्पश्चात उपस्थित जनों को भोजन प्रसादी का वितरण किया गया।
सोजत महोत्सव समिति की ओर से यह आयोजन धर्म, संस्कृति और समाज के संगम का प्रतीक बनकर उभरा, जिसने एक बार फिर सोजत की ऐतिहासिक और धार्मिक परंपरा को उजागर किया।











