सोजत: 28 सितम्बर2025 रविवार
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राष्ट्र की अस्मिता, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक एकता की अलख जगाने वाला संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर.एस.एस.) अब अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुका है। वरिष्ठ अधिवक्ता पंकज त्रिवेदी ने इस ऐतिहासिक अवसर पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि “सन् 1925 में डॉ. हेडगेवार द्वारा विजयादशमी के दिन बोया गया यह बीज आज विशाल वटवृक्ष बनकर विश्व पटल पर भारतीय चिंतन और संस्कृति का प्रतिनिधि है।”
त्याग और अनुशासन की अनुपम गाथा-
पिछले सौ वर्षों में संघ का सफर केवल संगठन निर्माण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यक्ति निर्माण से समाज और राष्ट्र निर्माण तक विस्तृत हुआ। शाखाओं के अनुशासन और सेवा भाव ने करोड़ों स्वयंसेवकों के जीवन को दिशा दी है।
सेवा के विविध आयाम-
आज संघ से प्रेरित अनगिनत सेवा परियोजनाएँ शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामोन्नति, पर्यावरण, आपदा प्रबंधन और सामाजिक समरसता जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। हर संकट की घड़ी में स्वयंसेवकों की उपस्थिति संघ की जीवन मूल्यों के प्रति निष्ठा का प्रमाण देती है।
शताब्दी वर्ष : उत्सव नहीं, संकल्प का क्षण-
वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिवेदी ने कहा – “शताब्दी वर्ष केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन और नए संकल्पों का क्षण है। संघ ने यह सिद्ध किया है कि भारत तभी प्रगति कर सकता है जब वह अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा रहे और सबको साथ लेकर चले।”
विश्व पटल पर सशक्त भारत-
आज जब भारत विश्व मंच पर आत्मनिर्भर और सशक्त राष्ट्र के रूप में उभर रहा है, तब संघ का शताब्दी संदेश यही देता है कि हमें अपनी संस्कृति पर गर्व करना चाहिए, समाज में एकता और समरसता बढ़ानी चाहिए और राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
✍️ पंकज त्रिवेदी एडवोकेट










