छह दिन बाद आया पानी, दस मिनट में बिजली गुल; प्यास के बीच सोजत वासी पूछ रहे—दुखड़ा किसे सुनाएं?
अनिश्चित पेयजल आपूर्ति और विद्युत कटौती से बढ़ी परेशानी, 550 रुपए में टैंकर मंगवाने की मजबूरी
सोजत। नगर में पेयजल और विद्युत आपूर्ति की बिगड़ती व्यवस्था ने आमजन की परेशानी बढ़ा दी है। कहीं पांच से छह दिन के अंतराल में पानी मिल रहा है तो कहीं पेयजल आपूर्ति के समय ही बिजली गुल हो जाने से लोग पानी भरने से वंचित रह जाते हैं। चुनावी सरगर्मियों के बीच बुनियादी सुविधाओं की यह स्थिति अब लोगों की नाराजगी का कारण बनने लगी है।
70 वर्षीय देवी बाई अपनी पीड़ा कुछ यूं बयां करती हैं—“क्या करें, राम तो रूठा ही रूठा, राज भी रूठ गया। अपना दुखड़ा किसको जाकर सुनाएं? न जलदाय विभाग सुन रहा है और न विद्युत विभाग।” उनका यह दर्द नगर के अनेक परिवारों की परेशानी को सामने रखता है। गुरुवार को स्वामी विवेकानंद मार्ग, चौगानिया, ढीरो का बास एवं धोलीवाड़ी क्षेत्र में करीब छह दिन बाद शाम 7 बजे पेयजल आपूर्ति शुरू हुई, लेकिन लगभग दस मिनट बाद ही बिजली चली गई। स्थानीय लोगों के अनुसार विद्युत आपूर्ति उस समय बहाल हुई, जब पानी की सप्लाई का समय निकल चुका था। ऐसे में कई परिवार पर्याप्त पानी नहीं भर पाए।
इन दिनों मेहंदी कटाई का सीजन होने के कारण बड़ी संख्या में काश्तकार एवं दिहाड़ी मजदूर सुबह ही खेतों और काम पर निकल जाते हैं। पेयजल आपूर्ति का निश्चित समय नहीं होने से उनके लिए घर पर पानी की व्यवस्था करना और कठिन हो गया है। मजबूरी में कई परिवारों को करीब 550 रुपए खर्च कर पानी का टैंकर मंगवाना पड़ रहा है, जो विशेषकर मजदूर एवं मध्यमवर्गीय परिवारों की जेब पर अतिरिक्त बोझ है। स्थानीय भैराराम ने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में काश्तकार आखिर कहां जाएं। वहीं राजाराम भाटी का कहना है कि अभी से पेयजल आपूर्ति के ये हालात हैं तो आगे स्थिति कैसी होगी, यह चिंता का विषय है।
मीडियाकर्मी चेतन व्यास के अनुसार नगर पालिका चुनाव की सरगर्मियों के बीच संभावित उम्मीदवार एवं नेता वार्डों में जनसंपर्क के लिए पहुंच रहे हैं तो उन्हें भी पेयजल और बिजली की समस्या को लेकर नागरिकों, विशेषकर महिलाओं की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। नगरवासियों की मांग है कि जलदाय एवं विद्युत विभाग आपसी समन्वय बनाकर कम से कम पेयजल आपूर्ति के दौरान निर्बाध बिजली सुनिश्चित करें तथा पानी की सप्लाई का निश्चित समय घोषित करें, ताकि लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान न होना पड़े।









