गौ सेवा से ही समृद्ध समाज का निर्माण संभव : लक्ष्मीनारायण दवे

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गौ सेवा से ही समृद्ध समाज का निर्माण संभव : लक्ष्मीनारायण दवे

सोजत। पूर्व काबिना मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे ने कहा कि गौ माता केवल वर्तमान ही नहीं, बल्कि भूत और भविष्य का भी आधार हैं। गौधन भारतीय संस्कृति, कृषि और समृद्धि का मूल है। उन्होंने कहा कि गौ माता की किसी भी प्रकार की सेवा सदैव पुण्यदायी एवं फलदायी होती है। वे अखिल भारतीय गुरु फूलनारायण आश्रम न्यास भवन के बाहर आयोजित गौभक्तों की परिचर्चा को संबोधित कर रहे थे।

इस अवसर पर जोधपुर की विभिन्न गौशालाओं के प्रेरक, प्रसिद्ध गौभक्त एवं ज्योतिषाचार्य पंडित पंकज जोशी ने कहा कि संस्कृत में ‘गौशाला’ का शाब्दिक अर्थ गायों की रक्षा एवं उनके आश्रय स्थल से है। उन्होंने बताया कि शास्त्रों में गाय को गौ माता एवं कामधेनु जैसे सम्मान सूचक नामों से संबोधित किया गया है, जो लोककल्याण एवं समृद्धि का प्रतीक हैं।

कार्यक्रम में विप्र फाउंडेशन के प्रदेश अध्यक्ष प्रमुख समाजसेवी चिरंजी लाल दवे (जालौर), सोजत आईएफडब्ल्यूजे विधानसभा प्रभारी चेतन व्यास, सहायक लोक अभियोजक पंकज त्रिवेदी, युवा नेता प्रफुल्ल ओझा सहित अनेक गौभक्त एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। परिचर्चा के दौरान थारपारकर सहित विभिन्न देशी नस्लों की गायों के संरक्षण, संवर्धन तथा गौपालन की उपयोगिता पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने गौ संरक्षण को भारतीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ता के लिए आवश्यक बताया।

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