सोजत में बुढ़ायत माता मंदिर महाकुंभ पाटोत्सव आज,
भक्ति और आस्था के महापर्व को लेकर सभी तैयारियां पूर्ण

सोजत।
सोजत-जोधपुर मार्ग स्थित ग्राम लुंडावास के प्राचीन एवं ऐतिहासिक बुढ़ायत माता मंदिर में मंगलवार, 28 जुलाई को आयोजित होने वाले श्रीमाली ब्राह्मण समाज के महाकुंभ बुढ़ायत माता मंदिर पाटोत्सव को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शक्ति एवं भक्ति के इस विशाल आयोजन में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालुओं के साथ-साथ प्रशासनिक, न्यायिक, औद्योगिक, सामाजिक एवं विभिन्न क्षेत्रों की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों के शामिल होने की संभावना है।
श्रीमाली समाज के प्रमुख चेतन व्यास ने बताया कि आषाढ़ सुदी चतुर्दशी पर यज्ञ, हवन, पूजन-अनुष्ठान, बुढ़ायत माता मंदिर, नर्मदेश्वर महादेव मंदिर एवं गुरु फूलनारायण की प्रतिमा का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। सायंकाल पूर्णाहुति, महाआरती एवं महाप्रसादी का आयोजन होगा। इस वर्ष के यजमान आनंदीलाल, कांतिलाल एवं चिरंजीलाल दवे परिवार जालौर रहेंगे।
पाटोत्सव की तैयारियों को अंतिम रूप देने में बुढ़ायत माता मंदिर व्यवस्था समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र व्यास, पूर्व अध्यक्ष हितेन्द्र व्यास, त्रिभुवन नारायण जोशी, धीरेन्द्र व्यास, सूर्य प्रकाश व्यास, माधव शास्त्री, धर्मेन्द्र व्यास, सुदीप व्यास, जगदीश नारायण जोशी, मनोज जोशी, महेन्द्र ओझा, चेतन दवे, मुनेश कुमार, दिनेश, मनीष व्यास, मितेश व्यास, भानू प्रकाश, कमल श्रीमाली सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं स्वयंसेवक सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। समिति ने अधिकाधिक श्रद्धालुओं से पाटोत्सव में शामिल होकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करने का आग्रह किया है।
मान्यता के अनुसार मारवाड़ के शासक राव जोधा के प्राणरक्षक सुन्दरलाल व्यास की धर्मपत्नी आशा देवी को माता ने वृद्धा (बुढ़िया) के रूप में दर्शन दिए थे। इसके उपरांत यहां मंदिर का निर्माण कराया गया, जो कालांतर में बुढ़ायत माता मंदिर के नाम से विख्यात हुआ। आज यह मंदिर क्षेत्र की प्रमुख आस्था स्थली के रूप में प्रसिद्ध है।
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बुढ़ायत माता के दरबार में सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य स्वीकार होती है। मंदिर का शांत, आध्यात्मिक एवं प्राकृतिक वातावरण श्रद्धालुओं को विशेष अनुभूति कराता है। मान्यता है कि माता की कृपा से अनेक लोगों को राजनीति, प्रशासन, न्यायिक सेवा, चिकित्सा, पुलिस सेवा, व्यापार तथा आध्यात्मिक क्षेत्र में सफलता प्राप्त हुई है। कई श्रद्धालु असाध्य रोगों से मुक्ति मिलने, निसंतान दंपतियों को संतान सुख प्राप्त होने तथा पुराने वृक्ष पर धागा बांधने, सवा मणी एवं नवरात्रि साधना से मनोकामनाएं पूर्ण होने की आस्था भी व्यक्त करते हैं।
आषाढ़ सुदी चतुर्दशी पर आयोजित होने वाले इस पावन पाटोत्सव में प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रीमाली ब्राह्मण समाज सहित विभिन्न समाजों के श्रद्धालु माता के दरबार में शीश नवाकर सुख-समृद्धि एवं मंगलकामना की प्रार्थना करते हैं। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है तथा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।









