
सोजत। अजय कुमार जोशी। श्री गुरु फूलनारायण आश्रम में गुरुवार को हनुमानजी महाराज का प्राकट्योत्सव बड़े धूमधाम एवं श्रद्धा-भाव के साथ मनाया गया। प्रातःकाल से ही आश्रम परिसर भक्ति-रस, सुगंधित पुष्पों और हर-हर हनुमान के जयघोष से गुंजायमान रहा।
वयोवृद्ध समाजसेवी जयंतीलाल त्रिवेदी एवं उनके पुत्र सुरेंद्र त्रिवेदी द्वारा विधि-विधानपूर्वक धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न किए गए। हनुमान मंदिर सहित आश्रम के अन्य मंदिरों का आकर्षक श्रृंगार सुगंधित फूलों, पुष्पमालाओं एवं द्रव्य से किया गया, जो भक्तों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।
“सुनहु पवनसुत पावन नामा, अति पवित्र जेहरि जपहि सुजाना…”सुन्दरकाण्ड पाठ ने बांधा भक्तिमय समां-
दोपहर 3:30 बजे सुधीर, अरविंद दवे एंड पार्टी द्वारा सस्वर संगीत-मय सुन्दरकाण्ड पाठ, हनुमान चालीसा एवं श्रीराम स्तुति की मनोहारी प्रस्तुति दी गई।सुन्दरकाण्ड की पंक्तियाँ—
“जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर…”।गूंजते ही पूरा आश्रम भक्तिरस से सराबोर हो उठा। भक्तजन भाव-विभोर होकर “बजरंग बली की जय” के जयकारों में डूब गए।
महाआरती और महाप्रसादी का आयोजन-
संध्या काल में भव्य महाआरती की गई, जिसके बाद महाप्रसादी का आयोजन हुआ। दूर-दूर से आए भक्तों ने प्रसादी ग्रहण कर स्वयं को धन्य महसूस किया। इस दौरान श्रीमाली ब्राह्मण समाज की ओर से त्रिवेदी परिवार का सम्मान कर उनके धार्मिक योगदान की सराहना की गई।
गणमान्यों ने की सहभागिता-


इस पावन अवसर पर पूर्व काबीना मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे, वरिष्ठ नागरिक समिति अध्यक्ष सुरेश ओझा, महालक्ष्मी ट्रस्ट अध्यक्ष रमेश व्यास, आश्रम न्यास अध्यक्ष सुरेंद्र त्रिवेदी, अपर लोक अभियोजक पंकज त्रिवेदी सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। आयोजन में रतनलाल जोशी,चेतन व्यास, हितेंद्र व्यास, प्रधुम्न बोहरा ,कैलाश दवे, ओमप्रकाश, अनिल ओझा, मुकेश ओझा,नारायणलाल त्रिवेदी, जगदीश व्यास, जनार्दन दवे, अरविंद द्विवेदी, हरीश व्यास, अश्विनी कुमार जोशी, दिनेश व्यास ,अशोक शर्मा, सुरेंद्र व्यास, नवीन जोशी, मनोज जोशी, चंद्रशेखर, भगवतीलाल त्रिवेदी, प्रफुल्ल ओझा, राजेश दवे, धीरेन्द्र व्यास, जितेन्द्र व्यास, श्रवण, पुजारी रवि, अजय जोशी, महेंद्र व्यास ,उषा, उमा, उज्ज्वला, दुर्गा सहित बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे।
उत्सव में झलकी भक्ति, संस्कृति और एकता की सुंदर मिसाल-
श्री गुरु फूलनारायण आश्रम में आयोजित यह दिव्य आयोजन न केवल भक्ति का पर्व रहा, बल्कि समाज की एकता, संस्कृति और आध्यात्मिक भावों का अद्भुत संगम भी साबित हुआ।










