पर्युषण महापर्व के दूसरे दिन बताए श्रावकों के ग्यारह कर्तव्य
रिपोर्टर – नवनीत राय ‘रुचिर’, सोजत
सोजत। श्री शांति वर्धमान जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में बुधवार को पर्युषण महापर्व का दूसरा दिन श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ मनाया गया। ट्रस्ट सचिव संजय संचेती ने बताया कि धर्मसभा में श्रावक-श्राविकाओं को वर्षभर में किए जाने वाले ग्यारह प्रमुख कर्तव्यों की जानकारी दी गई।
प्रवचन में संघ पूजा, साधार्मिक भक्ति, यात्रिक अठाई महोत्सव एवं तीर्थयात्रा, जिन मंदिर में स्नात्र महोत्सव, देवद्रव्य वृद्धि, महापूजा, धर्म जागरण, ज्ञान पूजा, उद्यापन, तीर्थ एवं शासन की प्रभावना तथा आलोचना एवं प्रायश्चित्त ग्रहण करने के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।
इस अवसर पर बताया गया कि ‘पर्युषण’ का वास्तविक अर्थ अपने भीतर ठहरना, आत्मा के समीप निवास करना तथा विषय-विकारों से मुक्त होकर आत्मचिंतन में स्थित होना है। वक्ताओं ने पर्युषण महापर्व को आत्मशुद्धि, आत्मनिरीक्षण एवं आत्मकल्याण का सर्वोत्तम अवसर बताते हुए श्रद्धालुओं से इसके संदेश को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।








