

सोजत में अणभे वाणी पर दो दिवसीय कार्यक्रम संपन्न, निकली विशाल शोभा यात्रा
ईश्वर से जुड़ने का सत्संग ही श्रेष्ठ माध्यम है – संत गहलोत
सोजत।
अनन्त सुख सम्राट सतगुरु सुखरामजी महाराज की अणभे वाणी पर आधारित दो दिवसीय सत्संग एवं आत्मकल्याण कार्यक्रम का समापन सोमवार प्रातः जैतारणिया गेट के बाहर स्थित माली समाज भवन में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ हुआ। इस अवसर पर जैतारण से पधारे संतश्री हजारीलालजी गहलोत महाराज ने अणभे वाणी के आधार पर केवल्य ज्ञान का विवेचन करते हुए श्रद्धालुओं को सांस-उसास में राम-नाम स्मरण की साधना तथा मानव शरीर में ही दिव्य चेतना के दर्शन का व्यावहारिक मार्ग बताया। उन्होंने कहा कि आत्मा में परमात्मा का साक्षात्कार ही जीवन का वास्तविक लक्ष्य है और सत्संग इस मार्ग का श्रेष्ठ साधन है।
इससे पूर्व प्रातः शहर में सुखरामजी महाराज की वाणीजी का बधावणा करते हुए संतश्री हजारीलालजी गहलोत महाराज की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा मगरिया बेरा कॉलोनी स्थित समाजसेवी एवं सेवानिवृत्त शिक्षा अधिकारी ओमप्रकाश प्रजापत (बोयल) के निवास से रवाना होकर दिल्ली दरवाजा, चांदपोल गेट, पुराना पुलिस थाना, मुख्य बाजार, सब्जी मंडी एवं धान मंडी होते हुए समारोह स्थल पहुंची।
शोभायात्रा में सैकड़ों महिलाएं सिर पर कलश धारण कर मंगलगीत गाती हुई चल रही थीं, जबकि पुरुष श्रद्धालु हाथों में भगवा राम-नाम की पताकाएं लेकर संतश्री के जयघोष करते हुए वातावरण को भक्तिमय बना रहे थे। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया।
मार्ग में समाजसेवी लक्ष्मण चौहान, मास्टर उदयराम माली सहित विभिन्न समाजों के लोगों ने पुष्पवर्षा, जलपान एवं स्वागत-सत्कार की व्यवस्था की। समाजसेवी शिक्षक नत्थाराम प्रजापत ने बताया कि इस धार्मिक आयोजन में जोधपुर, जैतारण, पीपाड़, कंटालिया, पाली सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी श्रद्धालु पहुंचे और संतश्री के प्रवचनों का लाभ लिया। रविवार सायंकाल भी संतश्री ने अणभे वाणी पर सारगर्भित प्रवचन दिए।
दो दिवसीय आयोजन को सफल बनाने में रामस्नेही समुदाय के कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यक्रम में प्रसादी के लाभार्थी समाजसेवी ओमप्रकाश प्रजापत (बोयल) रहे।








