आत्मशुद्धि और संयम की साधना के साथ पर्युषण महापर्व प्रारंभ
जिनालयों में स्नात्र महोत्सव एवं आराधना भवन में प्रवचन; आकर्षक रोशनी से सजे मंदिर
रिपोर्टर – नवनीत राय ‘रुचिर’, सोजत
सोजत। श्री शांति वर्धमान जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में मंगलवार को जैन धर्म का सर्वाधिक पवित्र एवं आत्मकल्याण का प्रतीक पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ प्रारंभ हुआ। आठ दिवसीय यह आध्यात्मिक महापर्व 15 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान नगर के विभिन्न जिनालयों एवं आराधना भवन में विविध धार्मिक अनुष्ठान विधिवत संपन्न होंगे।
ट्रस्ट सचिव संजय संचेती ने बताया कि पर्युषण महापर्व के अंतर्गत प्रतिदिन प्रातः नगर के जिनालयों में स्नात्र महोत्सव तथा धानमंडी स्थित आराधना भवन में धार्मिक व्याख्यान एवं प्रवचन होंगे। महापर्व के प्रथम दिन आयोजित प्रवचन में पर्युषण के आठ दिनों में किए जाने वाले पांच प्रमुख कर्तव्यों—अमारी प्रवर्तन, साधार्मिक भक्ति, क्षमापना, अट्ठम तप एवं चैत्य परिपाटी—का विस्तारपूर्वक विवेचन किया गया। श्रद्धालुओं को इन कर्तव्यों की आध्यात्मिक महत्ता बताते हुए हुए उन्हें जीवन में अहिंसा, करुणा, तप, मैत्री और क्षमाभाव अपनाने की प्रेरणा दी गई।
वक्ताओं ने कहा कि पर्युषण केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं, बल्कि आत्मा और अंतर्मन को निर्मल बनाने की अनुपम साधना है। यह महापर्व मनुष्य को अपने भीतर झांकने, भूलों का प्रायश्चित करने, समस्त जीवों के प्रति मैत्रीभाव रखने तथा संयमपूर्ण जीवन अपनाने का संदेश देता है।
महापर्व को लेकर नगर के सभी जैन मंदिरों को रंग-बिरंगी रोशनी और आकर्षक सजावट से अलंकृत किया गया है। प्रतिदिन सायंकाल आरती, मंगल दीपक तथा परमात्मा की मनोहारी आंगी रचना की जा रही है। पर्युषण की आराधना को लेकर श्रावक-श्राविकाओं में विशेष उत्साह है और जिनालयों में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।








